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डायनैमिक और डाइनामाइट

” डायनैमिक ”  ओज, ऊर्जा और गतिशीलता को ध्वनित करता है जबकि ” डाइनामाइट ” ऊर्जा के विस्फोटक प्रयोग का । विस्फोट हमेशा विध्वंस का प्रतीक ही नहीं होता, ऊर्जा के स्फुरित स्वरूप का सृजन के लिए उपयोग की प्रक्रिया का शुभारंभ भी होता है। मेरा मानना है कि प्रत्येक व्यक्ति में ये दोनों तत्त्व होते हैं। देश – काल – पात्र के अनुसार उन तत्त्वों का उपयोग विध्वंस या विनिर्माण का संकेत –    निर्धारण करता है।

बिहार का चम्पारण जिला ; जी हां, वही चम्पारण जो भारतीय राजनीति में प्रवेश करते हुए महात्मा गांधी का पहला सत्याग्रह स्थल बना ; और उसका एक अति पिछडा गांव , जो  कुछ साल पहले तक  रेल – रोड और बिजली से वंचित रहा था, वहीं 12 अक्टूबर 1954 को जन्म। बाबू जी सुशिक्षित किसान थे, मां को किताब और कॉपी में अंतर भी मालूम न था, वात्सल्य ऐसा कि कृष्ण के प्रति नन्द और यशोदा का प्यार परायापन का प्रतीक लगने लगे, बडे होने पर देवी – देवताओं की तस्बीरें और मूर्तियां न देखी होतीं तो मेरी नज़र में मां – बाप के अक्स से इतर और कोई तस्बीर न होती देवी – देवताओं की , आज भी ईश्वर या किसी ईश्वरीय शक्ति का स्मरण होते ही मानस–पटल पर बाबू जी और मां की तस्बीर ही उभरती है।

प्रारंभिक शिक्षा बाबू जी से , कुछ दिन मदरसे में भी, ग्यारहवीं तक की पढाई गांव से तीन किलोमीटर दूर नंगे पांव पैदल चल कर, 8वीं तक औसत से नीचे का छात्र, नौवीं में औसत और दसवीं व ग्यारहवीं कक्षा में टॉपर , केवल एक छात्र मुझसे आगे, कॉलेज में सबसे आगे, हिंदी से बीए ऑनर्स और एमए में युनिवर्सिटी में बहुत आगे, केवल दो – तीन  विद्यार्थी ही मुझसे आगे, ग्यारहवीं तक स्कूल में भोजपुरी में वार्तालाप, कॉलेज में ही हिंदी बोलना प्रारंभ, आज भी मेरे गांव में हिंदी बोलने पर अपने बुरा मान जाते हैं, कहते हैं, बहुत अंगरेजी झाडने लगे हैं।  राजभाषा अधिकारी के रूप में चयन में ऑल इंडिया टॉपर, लगभग 38 वर्षों की ससम्मान बैंकिंग सेवा में से 31 वर्ष स्पेशलिस्ट अफसर (राजभाषा अधिकारी) , 31 अक्टूबर 2014 को साठ वर्ष की आयु पूरी कर पंजाब नैशनल बैंक , प्रधान कार्यालय , नई दिल्ली से राजभाषा प्रभारी मुख्य प्रबंधक पद से सम्मान के साथ सेवानिवृत्ति।

स्कूल के दिनों से ही कविताएं , कहानियां लिखना शुरू, ग्यारहवीं के दौरान एक उपन्यास भी, किंतु छपी कोई नहीं, कॉलेज के दिनों में एक कहानी संकलन छपा  किंतु प्रकाशित नहीं हुआ , पहली किताब 1986 में कोलकाता से प्रकाशित, फिर 5 पुस्तकों और 6 पत्रिकाओं का सम्पादन, 100 से अधिक कवि सम्मेलनों का संचालन, दूरदर्शन और आकाशवाणी के दर्जनों कार्यक्रमों का संचालन, दूरदर्शन की ओर से श्रेष्ठ साहित्यकारों के अलावा बैंकों के अनेक सीएमडी, शीर्ष कार्यपालकों आदि का इंटरव्यु,   केन्द्र सरकार और अन्य संस्थानों में 200 से अधिक व्याख्यान, भारत सरकार की कई समितियों में सलाहकार सदस्य एवं दिल्ली सहित कई नगर राजभाषा कार्यान्वयन समितियों के सचिव। भारत के राष्ट्रपति द्वारा पुरस्कृत, केन्द्र सरकार के अनेक गृहमंत्रियों, वित्तमंत्रियों, सचिवों, राज्यों के  राज्यपालों, मुख्यमंत्रियों, भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नरों के करकमलों से पुरस्कृत।

बचपन की यादें, रेडियो पर राष्ट्रगान बजता तो बाबूजी,  बैठे हों या चल रहे हों या खाना खा रहे हों , तुरंत सावधान मुद्रा में खडे हो जाते , बाद में राष्ट्रगान के समय सावधान मुद्रा में खडे होने की गरिमा समझ में आई, राष्ट्रीयता का बीजारोपण उन्हीं दिनों स्वाभाविक रूप में,  वही भाव मेरे  बच्चों में भी स्वाभाविक संस्कार के रूप में  जागृत, पत्नी पुष्पा प्रसाद कुशल गृहिणी, बच्चों की सुव्यवस्थित परवरिश में उनका  योगदान सर्वोपरि, बेटा कुमार पुष्पक बंगलोर में एक एमएनसी में मैनेजर, बहू आरती आर्या  एक एमएनसी में एच आर एग्जीक्युटिव की नौकरी छोड कर आठ माह के अपने बेटे और मेरे पोता अपूर्व अमन की देखभाल कर रही हैं , बेटी शिल्पाश्री मासकम्युनिकेशन में एमए  गोल्ड मेडलिस्ट , दस माह के अपने बेटे और मेरे नाती कुमार श्रेष्ठ की देखभाल के लिए मीडिया की नौकरी छोड कर पति  सुमित कुमार  मैनेजर, भारतीय स्टेट बैंक के साथ गुजरात में रह रही हैं,  सबसे छोटी बेटी शिप्रा  और उनके पति अभिषेक आर्यन  बंगलोर में एमएनसी में  सीनियर सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं।

इस ब्लॉग के माध्यम से राजभाषा , हिंदी भाषा और साहित्य, कला – संस्कृति से जुडे लोगों सहित गलत को गलत और सही को सही कहने का साहस रखने वाले सभी देश्वासियों को जोडना, जागरूक करना, राष्ट्रीयता और देशभक्ति का भाव जागृत करना, अपनी आत्मकथा के माध्यम से गलत की खिलाफत और सही की हिफाजत में बेधडक हो कर आवाज़ उठाने  के लिए डायनैमिक और डाइनामाइट होने की प्रेरणा देना  ।

व्यक्ति

नाम                    : श्रीलाल प्रसाद  (सृजन-क्षेत्र में – अमन श्रीलाल )

जन्मतिथि           : 12.10.1954

शिक्षा                   : एम.ए. (हिंदी), बिहार विश्वविद्यालय , मुज़फ्फरपुर (बिहार)

पता                     : फ्लैट न. बी 1001 , रिषभ क्लाउड 9,  टॉवर- बी, माल रोड

अहिंसा खंड 2,  इंदिरापुरम , गाज़ियाबाद ( उ.प्र.) 201014

मोबाईल               : 9310249821

ईमेल                   : shreelal_prasad@rediffmail.com

सेवाएं

सेवानिवृत्ति           : 31.10.2014 को पंजाब नैशनल बैंक, प्रधान कार्यालय, राजभाषा विभाग, नई दिल्ली में प्रभारी मुख्य प्रबंधक पद पर

                            पांच वर्षों की सेवा के साथ

राजभाषा अधिकारी :  15 नवम्बर , 1983 से न्यु बैंक ऑफ इंडिया में,  04 सितम्बर 1993 से पंजाब नैशनल बैंक में

अनुभव                 :  31 वर्ष, देश के अग्रणी राष्ट्रीयकृत बैंकों  में राजभाषा ( स्पेशलिस्ट ) अधिकारी के रूप में
( कुल बैंकिंग सेवाएं 38वर्ष , उसके पहले अध्यापन भी )

सदस्य सचिव        :  दिल्ली बैंक नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति जनवरी , 2010 से सेवानिवृत्ति तिथि तक

सदस्य सचिव        :  नराकास दरभंगा (1996 – 1999) एवं मुज़फ्फरपुर    (1999-2001)

संस्थापक संयोजक : अखिल भारतीय बैंक राजभाषा सम्मेलन कोलकाता   (1988)

संयोजक               : तृतीय अखिल भारतीय बैंक राजभाषा सम्मेलन जयपुर(1991)

विशिष्ट उपलब्धियां

* भारत सरकार राजभाषा विभाग की वेबसाइट पर “महत्वपूर्ण सूचनाएं” – राजभाषा हिंदी – विद्वानों के विचार” लिंक में 21 पृष्ठों का

शोध आलेख -“ हिंदी एक मत से नहीं , एकमत से बनी थी राजभाषा”

* कम्पीयरिंग      : भारत सरकार के 10 से अधिक राजभाषा सम्मेलन

* दूरदर्शन एवं आकाशवाणी के 50 से अधिक कार्यक्रम

* 100 से अधिक कवि सम्मेलन एवं मुशायरा

*  संपादन        :  5 पुस्तकों, 6 पत्रिकाओं, 3 स्मारिकाओं का (अवैतनिक)

*  व्याख्यान     :  200 से अधिक सरकारी एवं गैर -सरकारी संस्थाओं में

*  परामर्श        : भारत सरकार, गृह मंत्रालय, राजभाषा विभाग के केन्द्रीय अनुवाद ब्यूरो एवं हिंदी प्रशिक्षण संस्थान के पाठ्यक्रम पुनर्निर्धारण समिति

कार्यक्षेत्र में उपलब्धियां

* सर्वोच्च पुरस्कार :

. भारत सरकार का इंदिरा गांधी राजभाषा पुरस्कार (प्रथम स्थान) माननीय राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी से 15.11.2014 को विज्ञान भवन में
(दिल्ली बैंक नराकास के सदस्य सचिव के रूप में उत्कृष्ट योगदान के लिए )

ख. बैंक को विगत दो वर्षों से प्रथम स्थान एवं निरंतर पांच वर्षों से अन्य स्थान प्राप्त

*  भारत सरकार से : क्षेत्रीय राजभाषा पुरस्कार 10 से अधिक प्रथम

*  अन्य पुरस्कार   : 40 से अधिक

वर्तमान स्थिति एवं अपेक्षाएं

1 . महत्वपूर्ण पारिवारिक उत्तरदायित्व  सम्पन्न

2 . पूरी तरह स्वस्थ-प्रसन्न, सकारात्मक सोच एवं राष्ट्रीय भावबोध

3 . राजभाषा, हिंदी भाषा एवं साहित्य के प्रयोग, प्रचार – प्रसार तथा विकास संबंधी कार्यों में सक्रिय सहभागिता में रुचि

4. महत्वपूर्ण दायित्वों के निर्वहन हेतु इच्छुक एवं सक्षम

 

(श्रीलाल प्रसाद)

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