ईश्वर और धर्म

 

                                          कोई पूर्वग्रह नहीं, केवल विचार

 

  • – ईश्वर के प्रति आस्था का कारण भय था और धर्म के प्रति विश्वास का कारण  भूख, भ्रष्टाचार व व्यभिचार।
  • फिर, भय, भूख, भ्रष्टाचार व व्यभिचार ने साथ मिल कर भेद पैदा किया।
  • भेद ने ईश्वर और धर्म को बांट कर भय, भूख, भ्रष्टाचर व व्यभिचार की चारदीवारी में बन्द कर दिया और खुद उनका पहरेदार बन बैठा।
  • फिर भय, भूख, भ्रष्टाचर और व्यभिचार ने भेद की अगुवाई में धर्म एवं ईश्वर का धन्धा शुरू कर दिया।
  • वैसे धंधेबाजों का न कोई ईश्वर है, न कोई धर्म , न आस्था, न विश्वास;
  • आस्था व विश्वास उनके धंधे के हथकण्डे हैं।
  • इसीलिए हे मनु – शतरूपा के वंशजो, आदम – हौवा की औलादो, एडम – ईव की संतानो !

 उठो, जागो,  कर्म करो और भय, भूख, भ्रष्टाचार व व्यभिचार की दीवारों को ढहा दो, भेद को समन्दर में डुबा दो या रेगिस्तान में जला दो अथवा अंतरिक्ष में विलीन करा दो , उन सबकी कैद से ईश्वर और धर्म को मुक्त कराओ, आस्था व विश्वास को संवेदनशील बनाओ ।  

 शेष कल…!

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