शराब और खानपान  

 

कोई पूर्वग्रह नहीं, केवल विचार (छह)

 

  1. पूरे देश में एक साथ एक बारगी ही शराबबन्दी लागू कर दी जाए। उसे राजनीतिक और

           धार्मिक मुद्दा नहीं बनने दिया जाए।

  1. ताडी को भी शराब ही माना जाए , कुछ लोगों के तुष्टीकरण के लिए ताडी को फल का

           रस कहने का छलावा न किया जाए।

  1. गैर-कानूनी रूप से शराब बनाने वाले और शराब सप्लाई करने वाले पर हत्या के प्रयास का और शराब सेवन करने वाले पर आत्महत्या के प्रयास का मुकदमा चलाया जाए।
  2. ड्रग्स सेवन परने वाले पर आत्महत्या का प्रयास करने और ड्रग्स सप्लाई करने वाले पर हत्या करने का मुकदमा चलाया जाए।
  3. उन सब के लिए यदि वर्तमान कानून में समुचित प्रावधान न हो तो आवश्यक संशोधन कर कठोर धाराएं जोडी जाएं।
  4. हर शहर की नगरपालिका दस हजार की जनसंख्या पर एक सब्जी मार्केट और

    मीट – मछली मार्केट बना कर दे, जैसा कि पटना के बोरिंग रोड चौराहा पर है।

 

 

अभी और भी बहुत कुछ … किंतु शेष कल ….!

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