100 / 70 सौ बटा सत्तर साल : थोडी प्रतीक्षा और !

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सौ बटा सत्तर साल : थोडी प्रतीक्षा और !

 

ईस्वी सन 2017 महात्मा गांधी के चम्पारण सत्याग्रह की 100वीं और भारत की स्वाधीनता की 70वीं वर्षगांठ का वर्ष है।

गांधी जी की जीवन-यात्रा सही को सही और ग़लत को ग़लत कहने की यात्रा है जो सत्य – अहिंसा का संबल ले कर सही के साथ सहयोग व ग़लत के साथ असहयोग करते हुए मतिभ्रम के शिकार एक व्यक्ति की तीन गोलियों से समाप्त हो जाती है; परंतु वह समाप्ति तो जीवन – यात्रा की थी, विचार – यात्रा तो न जाने कितनी पीढियों और सदियों तक, मैं कहूं तो .. अनंत काल तक चलने वाली है क्योंकि वह यात्रा भारत की आज़ादी के पुष्पन – पल्लवन व फलन की यात्रा है, जिसका बीजारोपण और अंकुरन एक सदी पहले हो चुका था। उन्हीं यात्राओं को समर्पित मेरी बहुप्रतीक्षित डायनैमिक डाइनामाइट अकथ कथा – आत्मकथा “आवाज़ बन आवाज़ दो”  सुधी पाठकों के हाथों में आने ही वाली है। बस, थोडी  प्रतीक्षा और…!

दो साल पहले 25 जून 2015 को मैंने फेसबुक पर घोषणा की थी कि मेरी आत्मकथा फेसबुक और ब्लॉग पर उसी वर्ष स्वाधीनता दिवस से शुरू होगी, तब से उसकी कई कडियां आईं , अब पुस्तक !!

शीघ्र प्रकाश्य पुस्तक की भावी रूपरेखा मैं अपने सुधी पाठकों से सहर्ष साझा कर रहा हूं।

ईद और रथयात्रा की हार्दिक बधाइयां एवं शुभकामनाएं ।

 

शुभाकांक्षी

‘अमन’ श्रीलाल प्रसाद

9310249821

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