शुक्रिया

शुक्रिया उन सबका , जिन्होंने देश और देशवासियों के सर्वांगीन विकास के लिए प्रतिबद्ध महान बैंकिंग संस्थाओं में अग्रणी पंजाब नैशनल बैंक में 35 वर्षों से अधिक की सम्मानजनक सेवा पूरी कर 31.10.2014 को पीएनबी परिवार ही नहीं, देश का वरिष्ठ नागरिक बनने पर मुझे बधाइयां देते हुए स्वस्थ-प्रसन्न और सक्रिय जीवन की शुभकामनाएं दी हैं । इस सेवाकाल में 08.10.1979 से 04.09.1993 तक न्यु बैंक ऑफ इंडिया, जो बैंकों के राष्ट्रीयकरण के दूसरे चरण में 15 अप्रैल 1980 को राष्ट्रीयकृत हुआ था और जिसका 04.09.1993 को पंजाब नैशनल बैंक में विलय हो गया ) का कार्यकाल भी शामिल है;परन्तु 21.03.1977 से 06.10.1979 तक देश के प्रथम क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक – चम्पारण क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक का सेवाकाल शामिल नहीं है। 19 दिसम्बर, 1973 से 24.06.1974 तक एक हाई स्कूल में हिंदी शिक्षक के रूप में, और उसके महीनों बाद बिहार सरकार में एक सप्ताह का कार्यकाल बिलकुल अलग विषय है । बिहार सरकार की नौकरी मैंने स्वेछा से छोडी थी और हाई स्कूल वाली नौकरी मैंने स्वेछा से छोडी थी या छोडने के लिए मुझे कहा गया था या मुझसे छुडा ली गई थी ( इस विषय पर फिर कभी विस्तार से बातचीत होगी ) , यह अलग मीमांसा का विषय है,परंतु दोनों के मूल में एक ही कारण था और वह था जेपी आन्दोलन से मेरा लगाव ।

अपने प्रत्येक सेवाकाल में मैंने जो कुछ भी किया – कहा , उस पर पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ मुझे गर्व है क्योंकि जो कुछ भी किया, पूर्वग्रह रहित होकर , वही किया जो मुझे करना चाहिए था, इसीलिए अपने किए – कहे पर मुझे कोई अफसोस नहीं,पछतावा नहीं,शर्मिंदगी नहीं। इस आत्मसंतोष और आत्मगौरव का एक कारण यह भी है कि जो मैं होना चाहता था, वह हुआ, जो करना चाहता था , वह किया; जो नहीं करना चाहता था , वह नहीं किया और जो नहीं होना चाहिए था,उसे भरसक होने भी नहीं दिया। इसके लिए मुझे मेरे वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ सहयोगियों का सहयोग मिला । मैं उन सब के प्रति हृदय से आभार प्रकट करता हूं ।

मेरी पत्नी पुष्पा,पुत्र पुष्पक , पुत्रबधू आरती ,पुत्री शिल्पाश्री और शिप्रा तथा जमाई श्री सुमीत कुमार एवं 15 दिनों के नाती श्रेष्ठ ( शिल्पा और सुमीत का पुत्र ) सहित समस्त स्वजनों-परिजनों के प्रति इस मौके पर मैं विशेष रूप से स्नेह और आभार व आदर प्रकट करना चाहता हूं , जिन्होंने कभी भी – कहीं भी मुझे धर्मसंकट अथवा दुविधा में नहीं पडने दिया और यदि कभी-कहीं वैसी स्थिति उत्पन्न होने का कोई कारण सामने आया भी तो उससे सफलतापूर्वक निपटने में सबने मेरा हौसला बढाया। इसीलिए मैं मानता हूं कि दुनिया के सुन्दरतम परिवारों में से एक मेरा परिवार है और दुनिया की सर्वोत्तम संस्थाओं में से एक में मैं ने काम किया । इसके लिए , ईश्वर है या नहीं, पूरे यकीन के साथ मैं यह नहीं कह सकता , किंतु यदि है तो , उस ईश्वर का लाख-लाख शुक्रिया ।

जाहिर है, बैंक सेवा पूरी कर मैं न तो किसी को कोई बोझ देकर और न ही किसी से कोई बोझ लेकर जा रहा हूं, क्योंकि —-
” कुछ इस तरह मैं ने जिन्दगी को आसां कर लिया
किसी से माफी मांग ली , किसी को माफ कर दिया ”
श्रीलाल प्रसाद
(पूर्व मुख्य प्रबंधक – राजभाषा,पंजाब नैशनल बैंक,प्रधान कार्यालय, नई दिल्ली मोबाईल न. 09310249821) ( आजसे अपने 45 साल पुराने नाम — अमन श्रीलाल – के नाम से मैं आपसे बातचीत करूंगा )

 

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