अतीत के झरोखे से भविष्य की झांकी

आज मेरा पौत्र यानी मेरा पोता “अपूर्व अमन” ; मेरे एकमात्र पुत्र कुमार पुष्पक (जो एक एमएनसी नाउस NOUS बंगलोर में मैनेजर है और जिसे मैं “बाबू” कहता हूं क्योंकि मैं अपने (स्वर्गीय)पिता जी को बाबू कहता था और मेरा पुत्र मेरी इच्छाओं , जरूरतों , अभिरुचि एवं मेरे स्वाभिमान आदि  का ध्यान उसी तरह रखता है जैसे मेरे पिता जी रखा करते थे तथा  अपने पिता जी को हमेशा अपने पास महसूसने का इससे बेहतर माध्यम मुझे दूसरा कुछ नहीं सूझा) एवं मेरी बहू आरती कुमारी (एक्स एचआर एग्जीक्युटिव,  हैवलेट पैकर्ड बंगलोर ) का पुत्र चार माह और 16 दिन का हो गया ।

अपूर्व अमन का जन्म 16दिसम्बर , 2014 को ज़ामिया हमदर्द मेडिकल कालेज एवं अस्पताल नई दिल्ली में हुआ । उन दिनों मैं 35 साक्षर अपार्टमेंट , पश्चिम विहार , नई दिल्ली में सपरिवार रहता था।वह आवास पंजाब नैशनल बैंक , प्रधान कार्यालय , राजभाषा विभाग के  प्रभारी मुख्य प्रबंधक के रूप में कार्यरत रहने के  दौरान मुझे बैंक लीज पर उपलब्ध कराया गया था और  31 अक्टूबर , 2014 को बैंक से सेवानिवृत्त होने के बाद भी 31 जनवरी , 2015 तक वहां  रहने की अनुमति प्रदान की गई थी । वहीं रहते हुए, उसी अस्पताल में मेरे दौहित्र यानी मेरे नाती ( मेरी पुत्री शिल्पाश्री एमए मास्कॉम गोल्ड मेडलिस्ट  एवं जमाई सुमित कुमार प्रबंधक, भारतीय स्टेट बैंक,  का पुत्र) कुमार श्रेष्ठ का जन्म 18 अक्टूबर , 2014 को हुआ था ।

मेरे दौहित्र और मेरे पौत्र, दोनों का नामकरण मेरे पुत्र कुमार पुष्पक ने ही किया । मेरे पुत्र ने अपने पुत्रका नाम “अमन” रखा क्योंकि वह मुझसे  बहुत प्यार करता है और चूंकि  मैं ने हाई स्कूल में पढने के दौरान अपना उपनाम “अमन” रखा था और उसी उपनाम से मैं रचनात्मक एवं लेखनकार्य करता हूं और शायद मेरी तरह ही मेरा पुत्र भी अपने पिता को अपने पुत्र में देखते रहना चाहता हो ,    संभव है , इसीलिए उसने अपने पुत्र का नाम मेरे नाम पर रखा हो । मैंने  अपने हाई स्कूल के दिनों में अपने उपनाम “अमन” पर दो पंक्तियां लिखी थीं : –

“ कहते अमन को तो अमन हैं लेकिन अमन के जीवन में अ मन से ही अमन
रहे अ मन से , रहे चाहे मन से, अमन की ही ख्वाहिश रखता है “अमन”

बैंक लीज पर 31 जनवरी ,2015 तक के लिए उपलब्ध उपर्युक्त आवास को 28 जनवरी , 2015 को ही खाली कर मैं  क्लाउड 9 , अहिंसा खंड 2 , इंदिरापुरम ,गाज़ियाबाद में  किराए के फ्लैट में आ गया (जिसे मैं ने अब खरीद लिया है ) और मेरी पुत्री शिप्रा ( सीनियर सॉफ्टवेयर इंजीनियर कॉग्निज़ेंट COGNIZANT   बंगलोर ) का अभिषेक कुमार ( सीनियर सॉफ्टवेयर इंजीनियर आईबीएम IBM बंगलोर ) के साथ शुभ विवाह सम्पन्न कराने के लिए मैं 26 फरवरी , 2015 को सपरिवार इंदिरापुरम  से मोतीहारी , ( अपने गृह नगर ) बिहार आ गया।वहीं से मेरे दौहित्र कुमार श्रेष्ठ के मधुबनी (मेरे जमाई सुमित कुमार के गृह नगर),बिहार में प्रथम आगमन के उपलक्ष्य में  03मार्च , 2015 को आयोजित स्वागत समारोह में शरीक हुआ और 09 मार्च , 2015 को सपरिवार मोतिहारी से इंदिरापुरम आ गया जहां से अपनी पत्नी पुष्पा प्रसाद , पुत्रबधू आरती कुमारी और पौत्र अपूर्व अमन के साथ 19अप्रील, 2015 को बंगलोर अपने पुत्र के पास आ गया ।

बंगलोर में जे.पी. नगर,सेवेंथ फेज , ब्रिगेड गार्डेनिया अपार्टमेंट में मेरे पुत्र का आवास है , उसी के कैम्पस में स्थित अगस्ता क्लब में मेरे पौत्र के प्रथम बंगलोर आगमन पर स्वागत समारोह का आयोजन हुआ जिसमें अनेक मित्रगण एवं परिजन सपरिवार उपस्थित हुए। वह समारोह आनन्द, आह्लाद,  सौहार्द और परस्पर लगाव का एक अद्भुत संगम था जो मेरे पुत्र के सच्चे मित्र मंडल का अच्छा उदाहरण था जहां मेरे पौत्र को आशीर्वाद देने के लिए वे सभी लोग सपरिवार पहुंचे जिन्हें संक्षिप्त अवधि में आयोजन की सूचना मिल गई  थी ।

समारोह में मेरे पुत्र नेमेरे हाथ में माईक देते हुए आशीर्वचन के दो शब्द कहने के लिए जब आग्रह किया तो मुझे अनायास अतीत के झरोखे से  भविष्य की झांकी दृष्टिगोचर होने लगी । मैंने कुछ क्षण अपने किशोर वय से  ले कर अब तक की यादों को सबके साथ साझा किया और बीते छह माह  की अवधि को अपने जीवन का सर्वोत्म कालखंड बताया क्योंकि इसी अवधि में मैं नाना और दादा बना, बैंक में 35 वर्षों कीसेवा पूरी कर ससम्मान सेवानिवृत हुआ , बैंकों में राजभाषा हिंदी के कार्यान्वयन के क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ कार्यनिष्पादन के लिए भारत सरकार द्वारा माननीय राष्ट्रपति के करकमलों से पुरस्कृत हुआ, मेरी सबसे छोटी पुत्री शिप्रा का शुभविवाह हुआ और मैंने दिल्ली एनसीआर में फ्लैट खरीदा तथा मेरे पुत्र ने ऊंचे पद और पैकेज पर नई कम्पनी ज्वाईन की । इसीलिए यह काल-खंड मेरे लिए विशेष रूप से यादगार बन गया  है ।

मैं ने कहा कि ईश्वर है या नहीं ,  यह पूरे यकीन के साथ मैं नहीं कह सकता किंतु यदि ईश्वर है और सब कुछ वही करता है  तो मैं उसके प्रति हृदय से आभार प्रकट करता हूं क्योंकि उसने मुझे और मेरे परिवार को वह प्रत्येक चीज दी है जिसकी हमें जरूरत  थी। ईश्वर मेरे पौत्र और पूरे परिवार पर अपना आशीर्वाद बनाए रखे, इसके लिए मैं प्रार्थना करता हूं।

मेरे बेटे ने कहा कि पापा जो करना चाहते थे और अब तक नहीं कर पाए हों  तथा वह स्वयं भी उसे पूरा करने में कोई विशेष योगदान नहीं कर पाया हो , उसे उनका पौत्र और उसका बेटा अपूर्व अमन पूरा करेगा ।मैं ने कहा,  “ बेटे , मैंने अपनी इछाएं या अभिरुचि जब आप पर नहीं थोपी तो आपके बेटे यानी अपने पौत्र पर कैसे थोपूंगा ।उसे  वही करना चाहिए  जो वह चाहे और जिसके लिए काबिलियत हासिल  कर सके । मुझे विश्वास है कि वह अपने  पूर्वजों के संस्कार से परिष्कृत और परिमार्जित होते हुए अपनी अच्छाइयों के बल पर सच्चा और विनम्र इंसान बनेगा । और चूंकि मेरा बेटा मुझसे बेहतर पुत्र, पति और पिता होने के साथ-साथ एक बेहतर प्रोफेशनल भी है इसीलिए मेरा यह विश्वास उचित है कि उसका बेटा भी हर क्षेत्र मेंउससे बेहतर  होगा । “

मैंने सभी आगंतुकों केप्रति आभार प्रकट किया ।

उन्हीं सुखद क्षणों को आंखों में समेटे भविष्य के आह्लादकारी क्षणों की प्रत्याशा में  अपने पौत्र के पास शीघ्र वापस आने की आशा के साथ  कल 03 मई, 2015  को मैं अपनी पत्नी के साथ इंदिरापुरम के लिए प्रस्थान करूंगा।

अमन श्रीलाल प्रसाद 
बंगलोर , 03 मई 2015

 

1,851 thoughts on “अतीत के झरोखे से भविष्य की झांकी

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