हकीकत हुई जब फिल्मी कहानी

बंगलोर, 26 जुलाई 2015

मो. 9310249821

“ जिन्दगी की कहानियों पर फिल्में बनती हैं, फिल्मों की कहानियों के अनुसार जिन्दगी नहीं चलती”
मेरा यह फलसफा मेरी ही जिंदगी में हकीकत बन कर उभरेगा, सोचा कब था ?

अगस्त 1998 में मेरा प्रमोशन स्केल – 2 में होने के बाद मई 1999 में मेरा ट्रांस्फर पंजाब नैशनल बैंक क्षेत्रीय कार्यालय दरभंगा से क्षेत्रीय कार्यालय मुज़फ्फरपुर हो गया, वहां मिठनपुरा चौक के निकट तीन कमरों का एक मकान बैंक लीज पर विनोद कुमार सिन्हा के सौजन्य से मिल गया। विनोद जी क्षेत्रीय कर्यालय में स्केल 1 अधिकारी थे और एच आर देखते थे, आज कल वे स्केल – 4 चीफ मैनेजर हैं और हेड ऑफिस में एच आर देखते हैं । मकान उनके साढू का था जो किशनगंज ग्रामीण बैंक में मैनेजर थे और मेरे गृह नगर मोतीहारी के ही मूल वाशिंदा थे। उनके बडे साले राजन कुमार पीएनबी में ही स्केल 2 मैनेजर थे जो सम्प्रति हेड ऑफिस में ही चीफ मैनेजर हैं, छोटे साले सज्जन कुमार भारतीय स्टेट बैंक में थे। मकान के केयर टेकर सज्जन जी ही थे। हम सबके परिवारों में एक-दूसरे के प्रति बहुत आदर भाव रहा जो आज भी है, राजन जी की मां तो मुझे भी अपने जमाई की तरह ही देखती थीं क्योंकि मेरे मकान मालिक,  जो उनके जमाई थे, मेरे शहर मोतीहारी के ही थे और दूसरे जमाई विनोद जी मेरे मित्र और सहकर्मी थे। परिवार के सभी लोग बहुत ही उच्च शिक्षा प्राप्त , संस्कारशील और सुसंकृत थे।

मेरा बेटा पुष्पक दरभंगा रहते ही दसवीं सीबीएससी की परीक्षाएं दे चुका था , कुछ दिनों में उनका रिजल्ट भी आ गया।पुष्पक का प्लस 2 में, शिल्पा का 8वीं एवं शिप्रा का 7वीं में सनशाईन पब्लिक  स्कूल मुज़फ्फरपुर में नामांकन हो गया। स्कूल आवास के निकट ही था, तीनों  पैदल ही स्कूल जाते। पुष्पक अपनी कक्षा और स्कूल में शीघ्र ही लोकप्रिय हो गए, स्कूल के वाईस प्रिंसिपल अंग्रेजी के शिक्षक थे और सभी छात्र-छात्राओं के बीच सर्वाधिक लोकप्रिय शिक्षक भी थे, पुष्पक उनके बहुत ही प्रिय छात्र हो गए थे । उन दिनों पुष्पक प्लस 2 भी कर रहे थे और आईआईटी की तैयारी के लिए सुबह ट्युशन करने भी जाते, फिर ग्वाला के यहां दूध लाने जाते, उसके बाद स्कूल जाते , ट्रिपल आई टी की भी तैयारी कर रहे थे , उन सब कामों में समय की बडी तंगी हो जाती उन्हें। मैं अपने रूटीन के अनुसार सुबह देर से जगता , चाय पीता और अखबार का पन्ना –  पन्ना पढ जाता, वह सब करते हुए ऑफिस जाने का समय हो जाता, फलस्वरूप सुबह घर का कोई काम नहीं कर पाता। एक दिन पुष्पक ने कहा कि सुबह-सुबह दूध लाने जाना , ट्युशन जाना और फिर स्कूल जाना , बहुत दौडधूप हो जाती है, एक काम पर होता हूं तो दूसरे पर मन टंगा रहता है , ये तीनों काम एक साथ मुझसे नहीं हो पाएगा,  इन तीनों में से कोई एक छोडना पडेगा। मैं ने तुरंत कहा कि बेटा, ट्युशन और स्कूल तो आप ही को जाना पडेगा, दूध लाने मैं चला जाया करूंगा। तब से अखबार के सभी समाचार विस्तार से पढना छूट गया, केवल हेड लाईन और सम्पादकीय ही पढ कर संतोष करने लगा, यदि कोई विशेष समाचार या साहित्यिक परिशिष्ट होता तो वह पेज सम्भाल कर रख लेता, फिर कभी फुर्सत के क्षणों में उसे पढता, वही सिलसिला आज भी जारी है।

मुज़फ्फरपुर प्राचीन वैशाली गणतंत्र और लिच्छीवि वंश के शासकों का मुख्यालय रहा था । काशी, मथुरा, अयोध्या और प्रयाग मुज़फ्फरपुर से पश्चिम दिशा में थे तो पूरब में अंग (वर्तमान भागलपुर, जहां प्राचीन विक्रमशिला विश्वविद्यालय रहा था ) व बंग (बंगाल) प्रदेश थे , उत्तर में जनक नगरी तो दक्षिण में मगध साम्राज्य था। वही मुज़फ्फरपुर आज उत्तर बिहार का सबसे बडा शहर और शिक्षा केन्द्र भी है, वहां सरकारी मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज, होमियोपथी कॉलेज के साथ-साथ विश्वविद्यालय भी है, और वहीं बिहार के सबसे पुराने कॉलेजों में से एक लंगट सिंह कॉलेज भी है जिसमें महात्मा गांधी के चम्पारण सत्याग्रह के समय आचार्य कृपलानी प्रोफेसर थे तो स्वाधीनता संग्राम के अंतिम दिनों में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर भी प्रोफेसर रह चुके थे। मुज़फ्फरपुर उत्तर बिहार का सबसे बडा व्यावसायिक केन्द्र भी है , वहां का सूतापट्टी मार्केट मुम्बई, सूरत और कानपुर के बाद कपडे का सबसे बडा थोक बाज़ार भी बताया जाता है। शायद इन्हीं तमाम कारणों से भारत सरकार ने दूर्शन के शुरूआती दिनों में ही मुज़फ्फरपुर केन्द्र की स्थापना कर दी जबकि बिहार की राजधानी पटना में दूरदर्शन केन्द्र की स्थापना उसके 12 साल बाद 1990 में हुई।

उन दिनों मैं क्षेत्रीय कार्यालय मुज़फ्फरपुर में राजभाषा प्रबंधक था और अन्य स्केल 2 अधिकारियों की तरह मैं भी हॉल में बैठता था । अजय मिश्रा जी क्षेत्रीय प्रबंधक थे, बाद में वे बैंक के महाप्रबंधक एवं मुख्य सूचना प्रौद्योगिकी अधिकारी भी हुए । एक दिन मैं क्षेत्रीय प्रबंधक के कक्ष में उनसे किसी विषय पर चर्चा कर रहा था तभी ऑफिस के एक स्टाफ ने एक विजिटिंग कार्ड मुझे देते हुए बतलाया कि कोई सज्जन मुझसे मिलना चाहते हैं, मैं ने कार्ड ले कर रख लिया और कहा कि मेरी सीट के पास उन्हें बिठाईए , पानी और चाय भी भिजवाइए  , तब तक मैं आता हूं। वे सज्जन थे दूरदर्शन केन्द्र मुज़फ्फरपुर के सीनियर प्रोग्राम प्रोड्युसर डॉ.रंगनाथ मिश्र, मैं उन्हें जानता नहीं था । शायद , उन्होंने मुझे बैंक का कोई बडा अफसर समझा था और यह भी समझ लिया था कि मैं उसी चैम्बर में बैठता हूं जिस चैम्बर में मेरे होने की बात उन्हें स्टाफ ने बताई थी । परिचय और दुआ – सलाम के बाद उनकी मुख-मुद्रा से मुझे इस बात का एहसास हो गया था ।

रंगनाथ जी ने बतलाया कि संसद में कल केन्द्रीय वित्तमंत्री यशवंत सिन्हा बजट प्रस्तुत करेंगे , दूरदर्शन केन्द्र बजट पर आधारित एक पैनल डिस्कशन कराना चाहता है, पैनल में विभिन्न क्षेत्रों के प्रसिद्ध विशेषज्ञ होंगे , 28 मिनट का स्लॉट होगा,  केन्द्र के डायरेक्टर साहब की इच्छा है कि उसकी कम्पीयरिंग आप करें। उन्होंने यह भी बतलाया कि उनकी योजना पहले इसकी कम्पीयरिंग युनिवर्सिटी के अर्थशास्त्र या वाणिज्य विभागाध्यक्ष से कराने की थी किंतु डायरेक्टर साहब ने जोर दे कर कहा है कि चूंकि यह बहुत ही महत्त्वपूर्ण डिस्कशन है , इसीलिए इसकी कम्पीयरिंग आप ही से कराई जाए। मैं विस्मित-सा हुआ , बोला कि उन्हें मेरे ऊपर इतना विश्वास कैसे है, न मैं उन्हें जानता हूं और न वे मुझे जानते हैं ! रंगनाथ जी ने बतलाया कि वे आप को जानते हैं और उस समय से जानते हैं जब आप कोलकाता में थे, उस समय वे कोलकाता आकाशवाणी के डायरेक्टर थे , उनका नाम है – ए.आर.खान। मुझे याद आया कि 1988 में कोलकाता के ग्रैण्ड होटल में दो दिवसीय राजभाषा सम्मेलन का संयोजन – संचालन मैं ने ही किया था, उस सम्मेलन में भारत के वित्तमंत्री, गृहमंत्री, कई अन्य मंत्री एवं सांसद, रिजर्व बैंक के गवर्नर , सभी सरकारी बैंकों के सीएमडी आदि उपसिथित हुए थे , आकाशवाणी और दूरदर्शन ने उस कार्यक्रम को व्यापक कवरेज दिया था। मैं ने रंगनाथ जी को हां कर दी।

जाते–जाते रंगनाथ जी ने मुझसे यह आग्रह किया था कि मैं वित्तमंत्री का पूरा बजट भाषण कल  दूरदर्शन पर जरूर सुन लूं ताकि कम्पीयरिंग में सुविधा हो। रंगनाथ जी के उस अंतिम वाक्य से मुझे लग गया था  कि शायद उन्हें मेरी काबिलियत पर पूरा विश्वास नहीं था। हालांकि वह पैनल डिस्कशन निर्धारित समय पर हुआ और इतना सफल एवं लोकप्रिय हुआ कि दूरदर्शन के मुज़फ्फरपुर केन्द्र के अलावा पटना केन्द्र ने भी उसे दो बार प्रसारित किया। उसके बाद मैं दूरदर्शन का रेगुलर गेस्ट कम्पीयर बन गया और बाद के वर्षों में दूरदर्शन की ओर से पीएनबी सहित कई बैंकों के सीएमडी , अन्य शीर्ष अधिकारियों , श्रेष्ठ साहित्यकारों आदि के इंटरव्यु करने के साथ-साथ दर्जनों बडे कार्यक्रमों की कम्पीयरिंग भी की।

उन्हीं दिनों मैं ने देखा कि पुष्पक दो – तीन दिनों से स्कूल नहीं जा रहे हैं। मैं ने समझा कि किसी प्रोजेक्ट पर काम कर रहे होंगे , इसीलिए पूछा नहीं। जिस दिन बजट भाषण सुनने के लिए मैं छुट्टी ले कर घर पर था और प्रस्तावित पैनल डिस्कशन की कम्पीयरिंग के लिए सवालों से संबंधित कुछ नोट्स तैयार कर रहा था , उसी दिन दो पहर में पांच – छह लडकियां आईं और सबने बारी – बारी से मेरे पांव स्पर्श कर नमस्ते किया । उन लोगों ने  बतलाया कि वे पुष्पक की दोस्त हैं। मैंने कहा कि पुष्पक सामने वाले कमरे में हैं , जा कर मिल लो, सबने एक स्वर में कहा- नहीं अंकल , हमें आप से बात करनी है। मन एकाएक सशंकित हो उठा, कहीं कोई शिकायत ले कर तो नहीं आईं हैं ये सब? अनायास पुरानी बात याद आ गई, जब कोलकाता में सनशाईन स्कूल की प्रिंसिपल ने पुष्पक की बहुत तारीफ की थी। मन ने कहा, नहीं,  मेरा बेटा ऐसा कुछ नहीं करेगा जिससे किसी ऐसी वैसी शिकायत का सामना करना पडे ।

मैं जैसे तंद्रा में चला गया, मुझे पटना की बात याद आई, कोलकाता से आने के बाद पटना के सेंट पॉल स्कूल में तीनों बच्चों का एडमिशन हुआ था और पुष्पक तीसरी क्लास में पढ रहे थे, एक दिन स्कूल से लौटने के बाद वह बहुत उदास थे , मैं ने कारण पूछा तो बतलाए – “ मत पूछिए पापा, आज मेरे इमेज का कबाडा हो गया, मैं क्लास में गप्प कर रहा था तो टीचर ने मुझे सजा दी और सजा के रूप में मुझे लडकियों वाली बेंच पर उनके बीच बैठा दिया ”। मैं ने हंसते हुए कहा था कि बेटा, ऐसी सजा तो हम लोगों को कभी नसीब ही नहीं हुई, हमारे समय में तो स्कूल की कौन कहे, कॉलेज में भी लडकियों से बात करना बहुत आसान नहीं था। आप इस अवसर का उपयोग लडकियों के बीच अपने को लोकप्रिय बनाने में कर सकते थे, एक बात याद रखिए, महिलाएं समाज की धुरी होती हैं, जो व्यक्ति महिलाओं की नजर में मान– सम्मान के लायक होगा, उसका मान– सम्मान पूरे समाज में होगा ”। बेटे ने कहा कि पापा, दुख तो इसी बात का है कि मैं किसी से बात न कर सकूं, इसीलिए टीचर ने मुझे लडकियों के बीच बिठाया । उस घटना को याद करते हुए मैं फिर आशंकित हो गया कि कहीं बेटे ने मेरी उस सीख को कुछ और तरह से तो नहीं समझ लिया और किसी लडकी से कुछ ऐसी वैसी बात तो नहीं कह दी ? फिर, मन ने ढाढस बंधाया कि नहीं, ऐसा नहीं हुआ होगा कुछ, क्योंकि पुष्पक जब डॉनबास्को स्कूल पटना से वापस दरभंगा आ गए थे और रोज पब्लिक स्कूल में उनका एडमिशन हुआ था तो वहां के छात्रों ने उनकी बहुत रिगिंग की थी , तब स्कूल की तीन – चार लडकियों ने ही उनका साथ दिया था जिनमें से एक लडकी उनकी खास दोस्त बन गई थी (जिसके बारे में पिछले एपीसोड में मैं ने चर्चा की थी, सुविधा के लिए उस लडकी का नाम “प्रेरणा” रख लीजिए) ।

मैं विचारों की उधेडबुन में लगा हुआ ही था कि उन पांच लडकियों में से एक ने आवाज दी –      (सुविधा के लिए उस लडकी का नाम “भावना” रख लीजिए )  – अंकल , हम आप से कुछ बात करना चाहती हैं। तंद्रा से जगता हुआ – सा मैं ने कहा – कहिए बेटा । “ हम लोग पुष्पक से माफी मांगने आयी हैं, आप इसमें हमारी मदद कीजिए और पुष्पक को कहिए कि वह हमें माफ कर दे ”। अब मेरी आशंका आश्चर्य में तब्दील हो गई थी। मेरी उत्सुकता बढ गई, मैं जानना चाहता था कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि लडकियां लडके से माफी मांगने आयी हैं ? लडकियों ने जो बात बताई, उससे मेरे पावों तले जमीन खिसकती महसूस हुई और मैं फिर से आशंकाओं में घिर गया। भावना ने कहना शुरू किया – “ हमलोगों ने प्रिंसिपल से शिकायत की थी कि पुष्पक ने हम सब से बदसलूकी की थी, प्रिंसिपल पुष्पक से बहुत नाराज हो गईं हैं और उसे स्कूल से निकालने की बात कर रही हैं, लेकिन वाईस प्रिंसिपल ने पुष्पक के फेवर में वीटो लगा दिया है, इसीलिए मामला अभी रूका हुआ   है” । मैं हत्प्रभ रह गया और मन ही मन सोचने लगा कि क्या इसीलिए पुष्पक दो – तीन दिनों से स्कूल नहीं जा रहा है ? अब आशंकाएं चिंता में बदल गईं और मेरे विश्वास को रौंदने लगीं। मैं मन – ही – मन तर्कवितर्क करने लगा, शायद बेटे ने कुछ न कुछ ऐसा किया होगा जिसके चलते लडकियों ने उसके खिलाफ शिकायत की होगी और अब उसे स्कूल से निकाले जाने की आशंका से उस पर तरस खा रही होंगी ।

मैं ने क्रोध और हताशा में पत्नी को आवाज दी, तभी लडकियां रोने लगीं, भावना बोल पडी –      “ लेकिन अंकल,  ऐसा कुछ हुआ नहीं था, पुष्पक ने हम में से किसी से भी कभी भी किसी भी तरह की बदसलूकी नहीं की ” । तो फिर , तुम लोगों ने ऐसी शिकायत क्यों की ? तुम्हारी शिकायत से उसका इमेज खराब हो गया, उसका कैरियर खराब होने के कगार पर पहुंच गया है । मैं ने सवालों की झडी लगा दी, साथ ही, इस बात को भी महसूस करने लगा कि बेटा कितने तनाव में इन दिनों रहा होगा, फिर भी उसने कुछ बताया नहीं, शायद उसके मन में भय हो कि मामला लडकियों की शिकायत का था और मैं ने बहुत पहले पटना में उनसे कहा था कि महिलाओं से सम्मान पाने वाला व्यक्ति पूरे समाज में सम्मानित होता है जबकि यहां परिस्थिति बिलकुल विपरीत थी जिसके कारण वह अन्दर ही अन्दर स्वयं को शर्मिंदा महसूस कर रहे होंगे । मैं कारणों की संभावनाओं के सागरमें डूब – उतरा ही रहा था कि लडकियों ने मेरे सवालों का जवाब देना शुरू किया और उन्होंने जो कुछ भी कहा , उसे सुन कर न मेरे पैरों तले जमीन खिसकी, न सिर के ऊपर आसमान फटा, न क्रोध आया और न ही हताशा हुई। भावना ने कहना शुरू किया – “ अंकल , पुष्पक शाहरूख खान की तरह स्टाईल मारता है और स्कूल की लडकियां भी उसे शाहरूख खान ही कहती हैं , हम लोग उसको रोज विश करती हैं और गुड मॉर्निंग कहती हैं, लेकिन वह कभी भी खुल कर हमारे विश को रिस्पॉंड नहीं  करता है , बल्कि शाहरूख खान वाले स्टाईल में ही  केवल गर्दन हिला देता है। इससे हम अपमानित महसूस करती हैं, इसीलिए हम सब ने खुद को इग्नोर किए जाने का उसे पाठ पढाने के लिए झूठी कम्प्लेन की थी । हमें नहीं मालूम था कि वह शिकायत इतनी खतरनाक हो जाएगी ”।

मैं ने कहा कि बेटे, जिन्दगी की कहानियों पर फिल्में बनती हैं, फिल्मों की कहानियों के अनुसार जिन्दगी नहीं चलती , तुम लोगों की फिल्मी स्टाईल की शिकायत पुष्पक के लिए कितनी महंगी साबित हो रही है, इसका अन्दजा तो अब तुम लोगों को हो गया होगा ? तब तक पत्नी आ गईथी , मैं ने उससे कहा कि इन्हें चाय – पानी पिलाओ, ये पुष्पक की दोस्त हैं, लडकियां बोलीं. अंकल , हम चाय नहीं पीतीं और पानी किचन में जा कर खुद पी लेंगी, आप हमारी बात पुष्पक से करा दीजिए। मैं ने पुष्पक को बुलाया, वे आये और शिष्टाचार दिखाते हुए “ हाय ” कह कर अपनी मित्रों का अपने घर में स्वागत किया, मैं ने कहा –बेटा, इतने दिनों से आप अन्दर ही अन्दर घुट रहे थे और मुझसे अपना दुख शेयर भी नहीं किया? “ क्या कहता पापा, इन लोगों ने जो कुछ किया, उसका रिजल्ट तो मैं भुगत ही रहा हूं , फिर भी इनमें से किसी से भी मुझे कोई शिकायत नहीं है, मैं प्रिंसिपल को सफाई देने भी नहीं जाऊंगा ”। बेटे के उन शब्दों से उसके दुख का एहसास मैं ने मन के अन्दर तक किया, साथ ही मैं ने यह भी महसूस किया कि उनके शब्दों को उन लडकियों ने भी बडी सिद्दत से महसूस किया।  “ किंतु अब ये आप से माफी मांगने आयी हैं बेटा ”, मैं ने कहा तो पुष्पक तुरंत बोल पडे  – “पापा, ये लोग फिर गलत तरीका अपना रही हैं , कम्प्लेन प्रिंसिपल से की थी तो इन्हें यह सफाई भी प्रिंसिपल के सामने ही देनी चाहिए ”। लडकियां बात समझ गईं और समवेत स्वर में “सॉरी” बोल कर चली गईं, बाद में पता चला कि उन सभी लडकियों ने लिखित रूप में प्रिंसिपल को सच्चाई से अवगत करा दिया था  , प्रिंसिपल बहुत नाराज हुईं थीं  और गुस्से में उन्होंने ने उन सबके गार्जियन को बुलाने का आदेश दे दिया था , किंतु यहां भी वाईस प्रिंसिपल के हस्तक्षेप से बात वहीं समाप्त कर दी गई थी।

अगली कडी में आप से मैं ऐसी तल्ख हकीकतें शेयर करूंगा जो मेरी, मेरे बच्चों और पूरे परिवार की जिंदगी में तबाही ला सकती थी, वैसी अनेक घटनाएं अनेक पैरेंट्स के जीवन में घटीं होंगी जिन्हें वे सम्भाल नहीं पाये होंगे ,  किंतु खुद को अपने बच्चों का दोस्त बनाने की मेरी पेशकश ने मेरे परिवार की छोटी – सी किश्ती को तबाही के समन्दर के तूफानों से बाहर निकाल पाने में मददगार हुई ।

तो मिलते हैं शीघ्र ही अगलीकडी में ….

यह कडी पूरा करते-करते 27 तारीख आ गई है, पंजाब के गुरदासपुर  में दुखद आतंकी हमले को इतिहास ने देखा है, देश के लिए शहीद जवानों की दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ,आईए, हम सब प्रार्थना करें और देश की सम्प्रभुता की रक्षा के लिए अपनी एकजुटता का प्रण लें ..।

इस कडी को पोस्ट करते –करते 28 तारीख भी आ गई है और इतिहास की आंखों ने सपनों की उडान को हकीकत के पंख लगाने वाले मिसाईल मैन भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का शिलॉंग में व्याख्यान के दौरान दिल का दौरा पडने से देहावसान होते भी देखा, हम डॉ. कलाम के प्रति उनके ही शब्दों को उद्धृत करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं… “ सपने वे नहीं होते जो आप सोते हुए देखते हैं, सपने वे होते हैं जो आप को सोने नहीं देते ..”    

अमन श्रीलाल प्रसाद

28 जुलाई 2015

मो.9310249821

 

4,056 thoughts on “हकीकत हुई जब फिल्मी कहानी

  • 20/10/2017 at 5:51 am
    Permalink

    UK popstar and celebrity Rachel Stevens – has webbed toes.
    The reason being is that the under storey and middle storey in most
    cases are occupied by weeds and climbers.
    Since the Harry Potter movies, has appeared in a handful of movies including Driving Lessons with
    Laura Linney and has done voiceover work.

    Reply
  • 20/10/2017 at 3:28 am
    Permalink

    UK popstar and celebrity Rachel Stevens – has webbed toes.
    Copyright (c) 2013 Freelance Press Network – Article Source:
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