क्यों जरूरी है यह पढना

 बंगलोर, 02 अगस्त 2015

अगले दो – तीन दिनों  में इसी फेसबुक नोट पर मैं अपनी आत्मकथा का बेहद मार्मिक प्रसंग पोस्ट करूंगा, आप से गुजारिश है कि यदि आप के पास समय नहीं है तो भी इसे पढने के लिए  समय पैदा कीजिए और इसे जरूर पढिए, इसलिए नहीं कि यह कहानी आप की  भी हो सकती है, बल्कि इसलिए कि यह कहानी आप की ही है।

श्रीलाल प्रसाद

बंगलोर, 02 अगस्त 2015 
मो. 9310249821

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