डायनैमिक और डाइनामाइट

डायनैमिक और डाइनामाइट
( सच कभी – कभी कल्पना से भी अधिक विस्मयकारी और अविश्वसनीय प्रतीत होता है )
इंदिरापुरम, 19 सितम्बर 2015

भारत सरकार के आमंत्रण पर 14 सितम्बर 2015 को विज्ञान भवन नई दिल्ली में आयोजित राजभाषा समारोह में भाग लेने के लिए मैं बंगलोर से दिल्ली आया। समारोह के मुख्य अतिथि थे भारत के माननीय राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी , अध्यक्षता गृहमंत्री राजनाथ सिंह जी ने की, गृह राज्यमंत्री श्री किरेन रीजीजू एवं राजभाषा विभाग के सचिव श्री गिरीश शंकर मंच पर विशेष रूप से उपस्थित थे। समारोह में माननीय राष्ट्रपति जी के करकमलों से वर्ष 2014-15 के सर्वोच्च राजभाषा पुरस्कार प्रदान किए गए। मेरे जैसे एक सेवानिवृत्त राजभाषाकर्मी को इस अति महत्त्वपूर्ण समारोह में आमंत्रित करने के लिए मैं भारत सरकार, गृहमंत्रालय, राजभाषा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का विशेष रूप से आभारी हूं, यह राजभाषा हिंदी और उससे तन्मयता के साथ जुडे व्यक्तियों के प्रति राजभाषा विभाग और उसके वरिष्ठ अधिकारियों के विशेष लगाव का प्रतीक है।

पंजाब नैशनल बैंक को ‘क’ क्षेत्र में 2014-15 का प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ , इसके लिए पीएनबी और उसके शीर्ष प्रबंधन सहित सभी स्टाफ सदस्यों को हार्दिक बधाइयां। यह प्रथम पुरस्कार पीएनबी को वर्ष 2012-13 और वर्ष 2013-14 में भी प्राप्त हुआ था। उन दिनों मैं पीएनबी प्रधान कार्यालय में राजभाषा विभाग का प्रभारी मुख्य प्रबंधक था, बैंक़ में राजभाषा हिंदी को लागू कराने में शीर्ष प्रबंधन और पीएनबी परिवार के सभी सदस्यों द्वारा दिए गए सहयोग के लिए मैं आजीवन आभारी रहूंगा।

पंजाब नैशनल बैंक के संयोजन में कार्यरत दिल्ली बैंक नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति को भी वर्ष 2013-14 में प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ था और साथ ही, समिति के सचिव के रूप में मुझे माननीय राष्ट्रपति जी के करकमलों से विशेष रूप से प्रशस्तिपत्र प्राप्त हुआ था, 11 जनवरी 2010 से पीएनबी प्रधान कार्यालय में राजभाषा प्रभारी मुख्य प्रबंधक और दिल्ली बैंक नराकास के सदस्य सचिव के रूप में कार्यरत रहने के बाद मैं 31 अक्टूबर 2014 को 60 वर्ष की आयु पूरी कर ससम्मान सेवानिवृत्त हो गया था, भारत सरकार का वर्ष 2013-14 का राजभाषा समारोह 15 नवम्बर 2014 को विज्ञान भवन नई दिल्ली में आयोजित हुआ था, प्रशस्तिपत्र ग्रहण करने के लिए भारत सरकार के आमंत्रण पर मैं सेवानिवृत्ति के बाद उपस्थित हुआ था । वर्ष 2011-12 में भी दिल्ली बैंक नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति को प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ था, 2010 से 2014 तक नराकास के सचिव के रूप में मेरे कार्यकाल के दौरान राजभाषा हिंदी के कार्यान्वयन में सदस्य बैंकों से प्राप्त सहयोग के लिए मैं उनका आभारी हूं। किंतु वर्ष 2014-15 में ये पुरस्कार प्राप्त नहीं हुए हैं , भविष्य के लिए मेरी शुभमकामनाएं ।

विज्ञान भवन में प्रवेश करते समय पीएनबी के कार्यपालक निदेशक के.ब्रह्माजी राव साहब से अनायास भेंट हो गई, वे बडी सहृदयता और सम्मान के साथ मिले, मेरा कुशल – क्षेम पूछा, महाप्रबंधक हरिकांत राय ने भी अपनापन दिखाया , वरिष्ठ प्रबंधक विनीत बाहरी और बलदेव मल्होत्रा सभागार के बाहर ही मिल गए थे , उन दोनों ने भी औपचारिकता का निर्वाह किया, किंतु उन्हीं दोनों के साथ खडे प्रेमचंद शर्मा , जो वर्तमान में पीएनबी प्रधान कार्यालय में राजभाषा विभाग के प्रभारी सहायक महाप्रबंधक तथा उस विभाग में मेरे उत्तराधिकारी हैं , ने विचित्र किंतु सत्य वाली शैली में व्यवहार प्रदर्शित किया, मैंने जब अपना हाथ आगे बढाया तब उन्होंने वैसा रूख अपनाया जैसा रूख किसी पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने भी कभी किसी भारतीय प्रधानमंत्री के समक्ष नहीं अपनाया होगा। वह मुझे अटपटा नहीं लगा क्योंकि मैं उनकी ग्रंथि को पहचानता हूं, किंतु मेरे साथ मेरी पत्नी पुष्पा भी थीं, उन्हें मेरे प्रति शर्मा जी का व्यवहार सामान्य शिष्टाचार के विरुद्ध लगा, पता नहीं, विनीत और बलदेव जी को एहसास हुआ या नहीं। शर्मा जी और मैं , दोनों 20 वर्षों से अधिक समय तक एक ही क्षेत्र में कार्यरत रहे हैं, चार बार तो ऐसा हुआ है कि कभी मैं उनका उत्तराधिकारी बना तो कभी वे मेरे, लेकिन मेरा दुर्भाग्य है कि वे कभी भी मुझसे मिल कर प्रसन्न नहीं होते, ऐसा क्यों है, इस विषय के साथ-साथ इस तरह के अन्य विषयों पर भी इसी पेज पर कभी विस्तार से बातचीत होगी ।

29 अगस्त के पोस्ट के बाद मैं इस पेज पर आज आपके सामने हाजिर हुआ हूं। इस बीच 05 सितम्बर का दिन एक ऐसे सुयोग का दिन भी आया जो सृष्टि के श्रेष्ठतम दार्शनिक, उपदेष्टा और जीवन की जीवंतता के उत्कृष्टतम शास्वत शिक्षक श्रीकृष्ण की जन्माष्टमी और प्रबुद्ध दार्शनिक, श्रेष्ठ शिक्षक एवं भारत के दूसरे राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म दिवस भी था । यह एक अद्भुत संयोग था, 5 सितम्बर को जन्माष्टमी और शिक्षक दिवस साथ-साथ मनाया गया, कई कार्यक्रमों के आयोजन हुए, मुझे अनेक आमंत्रण मिले, इसके अलावा कर्नाटक और दिल्ली में कई बैंकों एवं अन्य संस्थाओं ने हिंदी पखवाडे के उपलक्ष्य में भी मुख्य अतिथि या विशिष्ट अतिथि के रूप में आमंत्रित किया, मैं न तो उन कार्यक्रमों में शामिल हो सका और न इस पेज पर ही आप के सामने आ सका, इसके कई कारण रहे हैं, परिवार के कई सदस्य अस्वस्थ रहे , अभी भी हैं , मैं खुद पूरी तरह स्वस्थ नहीं हूं अभी , किंतु सबसे बडा जो कारण रहा है वह रहा है मेरे पाठकों का मेरे प्रति क्षोभ ।

मैं निवेदन कर दूं कि 15 अगस्त 2015 को मेरा यह ब्लॉग shreelal.in शुरू हुआ, इस एक महीने में मेरे ब्लॉग पर 3700 से अधिक हिट हुए हैं तथा भारत के अलावा दुनिया के 30 से अधिक देशों और शहरों के सैकडों पाठकों ने सब्सक्राइब किया है। इतनी बडी उपलब्धि के बावजूद मुझे कोई विशेष खुशी नहीं हुई है , बल्कि सदमा जैसा लगा है , क्योंकि मेरे कुछ प्रबुद्ध पाठकों ने मेरे फेसबुक और ब्लॉग पर प्रकाशित कई एपीसोड को अपने व्यक्तिगत जीवन से जोड कर देखा है, उन्हें ऐसा लगा है कि उनके निजी जीवन को लक्ष्य कर ही मैं ने वे एपीसोड लिखे हैं। इसके अलावा, कुछ खास लोगों ने मुझे यह भी कहा है कि ज्यादातर बातें मैं ने खुद की और अपने परिवार की ही की है, इससे आत्मश्लाघा की बू आती है , उनका सुझाव है कि जो उदाहरण मैं खुद से और अपने परिवार के जीवन से दे रहा हूं, वैसा उदाहरण समाज से ले कर दिया जाए तो बेहतर होगा ।

मैं यहां विनम्रतापूर्वक कहना चाहता हूं कि मैं कोई उपदेश कथा नहीं वांच रहा हूं और न ही कोई काल्पनिक उपन्यास लिख रहा हूं , मैं अपनी आत्मकथा लिख रहा हूं, मैं उन घटनाओं को लिख रहा हूं जो अतीत बन चुकी हैं और जिन्हें बदला नहीं जा सकता और न ही झुठलाया जा सकता है। मेरे जीवन में जब भी , जो भी, जिस रूप में भी सम्पर्क में आया और कुछ विशेष प्रभाव छोड गया, उसे उसी रूप में व्यक्त करना मेरी लेखकीय जिम्मेदारी है और ईमानदारी भी , कभी – कभी सच कल्पना से भी अधिक विस्मयकारी और अविश्वसनीय लगता है, इसीलिए अविश्वसनीय-सी लगने वाली घटनाओं को जांचने – परखने के बाद यदि प्रतिक्रिया दी जाए तो वह अधिक वस्तुपरक होगी और
प्रमाणिक भी। तभी तो यह डायनैमिक और डाइनामाइट होगा ।

तबीयत ठीक रही तो आज ही मैं गुजरात के लिए निकलने वाला हूं, क्योंकि कुछ दिन तो गुजारूं गुजरात में । शुक्रिया।
प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा में …..

( यह पोस्ट मेरे फेसबुक अकाउंट Shreelalprasad या नये पेज Shreelalprasad ‘Aman’ के साथ-साथ ब्लॉग shreelal.in पर भी देखा जा सकता है। सम्पर्क के लिए ईमेल पता shreelal_prasad@rediffmail.com या दूसरा email पता shreelalprasad1954@gmail.com है। इसके अलावा मैं अपने Twitter अकाउंट @shreelalprasad पर भी उपलब्ध रहूंगा ) ।

अमन श्रीलाल प्रसाद
9310249821

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