डायनैमिक और डाइनामाइट : एक आत्मकथा

बैंकों का राष्ट्रीयकरण एवं एकीकरण, क्या एक – दूसरे के विपरीत हैं और क्या विलय व एकीकरण निजीकरण की पहल है?

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बैंक राष्ट्रीयकरण दिवस पर विशेष ( SPECIAL POST ON BANK NATIONALIZATION DAY : 19 JULY)

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बैंक राष्ट्रीयकरण दिवस प्रत्येक वर्ष 19 जुलाई को मनाया जाता है, इस उपलक्ष्य में देशवासियों को अग्रिम हार्दिक शुभकामनाएं और बधाइयां । 19 जुलाई 1969 को 14 बडे कॉमर्शियल बैंकों का राष्ट्रीयकरण हुआ था; उसकी 47वीं वर्षगांठ से ठीक 7 दिनों पहले यानी 12 जुलाई 2016 से बैंकों में दो दिवसीय हडताल करने की घोषणा बैंक अधिकारियों एवं कर्मचारियों के कुछ संगठनों ने की थी। भारतीय स्टेट बैंक और उसमें विलय के लिए प्रस्तावित उसके सहायक बैंकों की याचिका पर सुनवाई करते हुए माननीय दिल्ली हाई कोर्ट ने बैंकों में प्रस्तावित उस हडताल पर रोक लगा दी, फलस्वरूप बैंककर्मियों के संगठनों ने भी हडताल वापसी की घोषणा कर दी और तदनुसार वह हडताल नहीं हो सकी। उस हडताल का प्रमुख उद्देश्य था – भारतीय स्टेट बैंक में उसके सहायक बैंकों सहित भारतीय महिला बैंक के प्रस्तावित विलय (इसके लिए केन्द्रीय मंत्रीमंडल ने 15 जून 2016  की बैठक में निर्णय ले लिया था) एवं राष्ट्रीयकृत बैंकों के संभावित एकीकरण का विरोध करना।

अपने 24 जून के पोस्ट में मैंने भारतीय स्टेट बैंक में उसके सहायक बैंकों और भारतीय महिला बैंक के विलय की चर्चा करते हुए आज़ादी के बाद कॉमर्शियल बैंकों को सार्वजनिक क्षेत्र में लाने के उद्देश्यों तथा उसकी प्रक्रिया का स्थूल विवेचन किया था। अब बैंकों में घोषित उस हडताल की वापसी के सन्दर्भ में उन उद्देश्यों और प्रक्रियाओं की सूक्ष्म विवेचना आवश्यक प्रतीत हो रही है ताकि आम जनता तक उसके हानि – लाभ की सच्चाई पहुंचाई जा सके। इसीलिए उस गूढ विषय की चर्चा में गूढ और पारिभाषिक शब्दावलियों तथा तकनीकी पक्षों की उलझनभरी बाजीगरी का सहारा न ले कर यहां सरल व सहज तरीके से सीधे – सादे शब्दों में बात रखने की कोशिश की जाएगी। तो आइए, कुछ खास बिन्दुओं के माध्यम से इस मामले को समझा जाए : जैसे – राष्ट्रीयकरण के पहले बैंकिंग यानी शुद्ध लाभकारी बैंकिंग,  राष्ट्रीयकरण के बाद बैंकिंग यानी शुद्ध कल्याणकारी बैंकिंग, राष्ट्रीयकरण का परिणाम यानी जमाकर्ताओं की जमापूंजी की सुरक्षा के साथ – साथ बैंककर्मियों में सेवा सुरक्षा का प्रबल भाव , राष्ट्रीयकरण के उद्देश्यों की पूर्ति यानी बैंक शाखाओं का विस्तार और बैंक ऋण तक गरीब – गुरबों की भी पहुंच , भविष्य में बैंकिंग तथा बैंकिंग का भविष्य यानी एक ही साथ कल्याणकारी एवं लाभकारी बैंकिंग।  

        

19 जुलाई 1969 को निजी क्षेत्र में कार्यरत उन सभी कॉमर्शियल बैंकों का राष्ट्रीयकरण कर दिया गया जिनमें कुल जमा राशि 50 करोड रूपये से अधिक थी। उस समय देश में कार्यरत सैकडों बैंकों में से वैसे केवल 14 बैंक ही पाए गए जो निर्धारित शर्तों को पूरा कर रहे थे, अत: उन सभी 14 बैंकों का राष्ट्रीयकरण कर दिया गया। 15 अप्रैल 1980 को एक बार फिर निजी क्षेत्र में कार्यरत बडे कॉमर्शियल बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया, इस बार उन सभी निजी क्षेत्र के कॉमर्शियल बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया जिनमें कुल जमा राशि 200 करोड रूपये से अधिक थी। उस समय वैसे 6 बैंक ही पाए गए, अत: उन सभी 6 बैंकों का राष्ट्रीयकरण कर दिया गया यानी 1969 में जिन बैंकों की कुल जमा राशि 50 करोड रूपये भी नहीं थी , जिसके चलते उस वक्त राष्ट्रीयकरण के दायरे में वे नहीं आ सके थे, 11 साल बाद 1980 में उन्हीं बैंकों की जमा राशि 200 करोड रूपये से भी अधिक हो गई। आज तो बैंकों की किसी एक बडी शाखा में ही 50 करोड क्या , 200 करोड रूपये से भी अधिक की जमा राशि है और एक – एक बैंक की जमा राशियां तो कई – कई लाख करोड रूपयों में हैं। अब प्रथम राष्ट्रीयकरण के 47 साल बाद 50 करोड रूपये तथा दूसरे चरण के राष्ट्रीयकरण के 36 साल बाद 200 करोड रूपये की राशि कई लाख करोड रूपयों में तब्दील हो गई है तो विद्वान अर्थशास्त्री लोग बताएं कि ऐसा केवल मुद्रास्फीति के चलते हुआ है अथवा देश ने कुछ विकास भी किया है? और यदि देश ने विकास किया है तो क्या बैंकों के राष्ट्रीयकरण का उस विकास में कोई योगदान है? इस प्रश्न की शव – परीक्षा (पोस्टमार्टम) साधारण – से लगने वाले कुछ आंकडों के नश्तरों से की जा सकती है।

राष्ट्रीयकरण के पहले बैंकों का स्वरूप विशुद्ध लाभकारी बैंकिंग का था यानी उनका मालिकाना हक बडे – बडे पूंजीपतियों, औद्योगिक घरानों और व्यापारियों के पास था जिनका एकमात्र उद्देश्य बैंकिंग व्यवस्था का उपयोग व्यवसाय के रूप में करना और उससे लाभ कमाना था। इसीलिए उनका पूरा तंत्र बडे – बडे शहरों में ही शाखाएं खोलने तथा उससे लाभ कमाने में व्यस्त रहता था । न तो उन बैंकों का और न ही उनके तंत्र का आम जनता से कोई सरोकार था। उनमें बडे और अमीर लोगों के ही रूपये जमा होते थे और उन्हीं को उन बैंकों से ऋण भी मिलते थे। आम आदमी तो उन बैंक शाखाओं से ऋण लेने अथवा उनमें अपने पैसे जमा करने के लिए खाता खोलने की सोचने को कौन कहे, उनके परिसर में जाने से भी डरता था; वह तो देसी सेठों – साहूकारों के चंगुल में ही फंसा हुआ था, उसकी पीढी दर पीढी साहूकारों का व्याज चुकाने और अघोषित बंधुआ मज़दूर की जिन्दगी बसर करने में ही गुजर जाती थी।

जिस आज़ाद भारत में 1969 में 6 लाख से भी अधिक गांव थे, जिस देश की जन संख्या 65 करोड से भी अधिक थी और जिसकी 80 प्रतिशत से भी अधिक की आबादी गांवों में निवास करती थी तथा खेती व दूसरे छोटे – मोटे ग्रामीण एवं कुटीर उद्यमों से जीवनयापन करती थी, जिस भारत को गांवों का देश तथा जिसकी अर्थव्यवस्था को कृषिप्रधान कहा जाता था, उस देश में कॉमर्शियल बैंकों की कुल शाखाएं 8262 मात्र थीं जिनमें ग्रामीण एवं अर्धशहरी शाखाओं की संख्या मात्र 1860 थी, बैंकों में कुल जमा राशि 4336 करोड रूपये मात्र तथा कुल अग्रिम राशि 3017 करोड रूपये मात्र थी, उसमें से कृषि ऋण की राशि 62 करोड रूपये तथा लघु उद्योगों को प्रद्त्त ऋण राशि 182 करोड रूपयों से भी कम थी। इस प्रकार 65 करोड की आबादी वाले देश में प्रति 78 हजार की जनसंख्या पर एक बैंक शाखा थी (जिसमें ग्रामीण एवं अर्धशहरी क्षेत्रों में शाखाओं की संख्या कुल संख्या के मात्र 22 प्रतिशत थी) तथा बैंककर्मियों की संख्या 2 लाख थी, कृषि-प्रधान देश में कुल बैंक ऋणों का केवल 2 प्रतिशत कृषि क्षेत्र को तथा 6 प्रतिशत लघु उद्योगों को था जबकि शेष 92 प्रतिशत ऋण बडे व्यावसायिक एवं औद्योगिक घरानों के पास था।

भारत में कॉमर्शियल बैंकों के राष्ट्रीयकरण के पहले विद्यमान बैंकिंग व्यवस्था का वह स्वरूप तब अच्छी तरह समझा जा सकता है जब बैंकों का वर्तमान स्वरूप  एवं नेटवर्क सामने रखा जाए। 31 मार्च 2016 को भारतीय स्टेट बैंक व उसके सहायक बैंकों, राष्ट्रीयकृत बैंकों , क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (1969 में ऐसे किसी बैंक का कोई अस्तित्व भी नहीं था), निजी क्षेत्र के वाणिज्यिक बैंकों तथा विदेशी बैंकों आदि सहित देश में कॉमर्शियल बैंक शाखाओं/कार्यालयों की कुल संख्या 1,32,587 है जिसमें ग्रामीण एवं अर्धशहरी शाखों/कार्यालयों की संख्या 85,606 यानी कुल बैंक शाखाओं का 65 प्रतिशत है जो 1969 में मात्र 22% था, आज प्रति 9000 की जनसंख्या पर एक बैंक शाखा है जबकि 1969 में प्रति 78000 की जनसंख्या पर एक बैंक शाखा थी। दिसम्बर 2013 के अन्य आंकडे देखें तो बैंककर्मियों की संख्या 11,75,149 थी, सकल जमा राशि 67,505 अरब (बिलियन) रूपये तथा ऋण राशि 54,117 अरब (बिलियन) रूपये थी जिसमें से मध्यम एवं बडे उद्योगों को प्रदत्त ऋण राशि 20,866 अरब (बिलियन) रूपये थी और शेष 33,251 अरब (बिलियन) रूपये कृषि, ग्रामीण एवं कुटीर उद्यम, सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों, अन्य खुदरा व्यवसायों तथा सेवा क्षेत्र आदि में ऋण दिए गए यानी मझोले और बडे उद्योगों को प्रदत्त ऋण राशि की मात्रा सकल ऋण राशि के 38% ही थी जबकि 1969 में उसकी मात्रा 92% थी।

इन आंकडों से एक बात साफ दिख रही है कि 1969 से 2016 में देश की आबादी बढ कर लगभग दुगुनी हो गई है तो बैंक शाखाओं की संख्या बढ कर 16 गुनी हो गई है तथा प्रति शाखा जनसंख्या का दबाव 8 गुना से भी ज्यादा कम हो गया है और जमा राशि तथा ऋण राशि में बृद्धि का तो गुणनफल निकालना भी मुश्किल है, जहां राष्ट्रीयकरण के पहले 2 से 3 प्रतिशत लोग ही बैंकिंग तंत्र से जुड पाए थे,वहीं आज 80% से भी अधिक जनता बैंकिंग व्यवस्था से जुड गई है ; तो क्या ये भीमकाय आंकडे बैंकों के राष्ट्रीयकरण के सकारात्मक प्रभाव के साक्षी नहीं हैं?

बैंकों के राष्ट्रीयकरण के बाद सार्वजनिक क्षेत्र के सभी बैंक सरकार की नज़र में तथा आम जनता की नज़र में भी एक समान हो गए, सबकी जमा एवं ऋण योजनाओं की शर्तें समान हो गईं, वे बैंक सरकारी योजनाओं के कार्यान्वयन के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के साधन हो गए, धीरे – धीरे वे बैंक सर्वसाधारण के सामाजिक – आर्थिक विकास के साधन बनते हुए उसका माध्यम बन गए। अब उनका ध्येय लाभ कमाना न रह कर ऋण उपलब्ध कराना भर रह गया, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की स्थापना के मूल में तो केवल वही ध्येय रहा था, ग्रामीण बैंक अधिक व्याज दर पर जमा प्राप्त करते और कम एवं विभेदक व्याज दर पर साधनहीन लोगों को ऋण मुहैया कराते , देशव्यापी नेटवर्क वाले कॉमर्शियल बैंकों के सामने स्थानीय प्रकृति के वे क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक जमा और अन्य व्यावसायिक क्षेत्रों में तो कहीं नहीं ठहरते थे किंतु स्थानीय आधार पर ऋण मुहैया कराने में वे बेहद लोकप्रिय होने लगे, हालांकि तब उनकी ऋण राशि की मात्रा बिलकुल सीमित थी ।

दूसरी तरफ, सार्वजनिक क्षेत्र के सभी बैंकों की स्थिति समान हो जाने के कारण उन बैंकों में परस्पर प्रतिस्पर्धा कम होने लगी और आगे चल कर समाप्तप्राय हो गई। बैंककर्मियों की सेवाशर्तें भी अधिक सुदृढ और सुरक्षित हो गईं, बैंकों में नौकरी करना और बैंककर्मियों का नेता होना ग्लैमर पैदा करने लगा, युनियन व एसोशिएशन के नेताओं का मुख्य काम बैंककर्मियों की नौकरी की सुरक्षा ( वह तो राष्ट्रीयकरण के बाद बहुत हद तक स्वत: सुरक्षित हो गई थी) तथा बैंक के वित्तीय संसाधन एवं शीर्ष प्रबंधन के बीच पहरेदारी करने से हट कर कुछ और हो गया, ऐसे में प्रबंधन में भी जमा और लाभप्रदत्ता के लक्ष्यों को प्राप्त करने के बदले अधिक से अधिक ऋण बांट कर सियासी हल्कों में अपनी पहुंच बढाने की प्रवृत्ति प्रबल हो गई, जमा खाते खोलने में जमा राशि से अधिक खातों की संख्या तथा ऋण वितरण में भी ऋणों की गुणवत्ता के बदले ऋणियों की संख्या तथा ऋण राशि की मात्रा अधिक महत्वपूर्ण हो गई। इस प्रकार बैंक का स्वरूप लाभकारी से कल्याणकारी हो गया। ऐसे में बैंकों का वित्तीय स्वास्थ्य किधर जाता, उसका अन्दाजा लगाना बहुत मुश्किल काम नहीं रह गया था, फिर भी….?

कॉमर्शियल बैंकों को सार्वजनिक क्षेत्र में लाने का मूल लक्ष्य तो पूरा हो रहा था, बैंकों की पहुंच अभूतपूर्व एवं अद्वितीय रूप में दूर – दराज के गांवों तक हो रही थी, गरीब – गुरबे भी बैंकिंग व्यवस्था का लाभ उठा रहे थे, बच्चे के जन्म से ले कर उसकी पढाई, कमाई, सगाई, बेटी की बिदाई, मां – बाप के लिए एक अदद छत की भरपाई तथा दादा – दादी की दवाई यानी रोटी, कपडा, मकान और सामाजिक सुरक्षा व सम्मान , मनुष्य की सभी आर्थिक – सामाजिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए बैंक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का माध्यम बन गए; बडे – बडे कामों और बडी – बडी परियोजनाओं के लिए भी उनका योगदान तो जारी रहा ही। इन तमाम अच्छे कामों पर पानी फिरने लगा बैंक के वित्तीय संसाधनों और शीर्ष प्रबंधनों के बीच पहरेदारी का उत्तरदायित्व निभाने वाले संगठनों के शीर्ष पदाधिकारियों द्वारा अपने मूल उद्देश्यों से भटक जाने के कारण। नतीजा जो सामने आना था, सो आया ; तुलन – पत्रों में परिसम्पत्तियां बनी रहीं, उनमें इजाफा होता रहा, उन पर व्याज दर व्याज लगते रहे, लाभ भी भरपूर होता रहा, मगर ये सब कुछ केवल तुलन – पत्रों यानी कागजों में होते रहे, तिजोडी से पैसे गायब होते रहे, बहुत – से बैंकों के सामने अपने कर्मियों को वेतन देने तक के लाले पडने की नौबत आने लगी, क्योंकि राष्ट्रीयकरण के पहले जिस तरह केवल लाभकारी बैंकिंग थी, वैसे ही, राष्ट्रीयकरण के बाद बैंकिंग केवल कल्याणकारी हो गई, जबकि जरूरत थी – कल्याणकारी एवं लाभकारी बैंकिंग की।

वैसी ही परिस्थितियों में 1991 में आर्थिक उदारीकरण और वैश्वीकरण का दौर शुरू हुआ जिसमें कल्याण के सभी कार्य जारी रखते हुए भी लाभ कमाने पर भी जोर दिया जाने लगा , वास्तविक रूप में बैंकों को प्राप्त आय को ही बैंकों की सम्पत्ति के अंतर्गत माना जाने लगा , डुबन्त ऋण राशि को अलग किया जाने लगा, डुबन्त ऋण राशि के व्याज को ही नहीं, उसकी मूल राशि को भी बैंकों की परिसम्पत्ति से अलग किया जाने लगा, इतना ही नहीं, उस डुबन्त मूल एवं व्याज राशि से हुई हानि को पूरा करने के लिए शुद्ध रूप में उपलब्ध परिसम्पत्ति में से ही राशि अलग करने के प्रावधान किए जाने लगे, उसी डुबन्त ऋण राशि को अनर्जक आस्तियां यानी एनपीए ( नॉन पॉरफॉर्मिंग असेट्स) कहा गया तथा वैसी ऋण राशि की पहचान करने, उसे अलग करने और उसके बराबर उपार्जक (पॉरफॉर्मिंग) ऋण राशि में से प्रावधान (प्रोविजन) करने की सटीक प्रक्रिया अपनाई गई। उस प्रक्रिया का परिणाम यह हुआ कि जो सभी 20 राष्ट्रीयकृत बैंक साल दर साल करोडों रूपये का मुनाफा अपनी बैलेंस शीट में दिखाए जा रहे थे, उनमें से 13 बैंक घाटे में आ गए और घाटा भी करोडों – अरबों रूपयों में ! प्रश्न उठता है कि ऐसी स्थिति बैंकों के सामने आई ही क्यों और कैसे ?

बैंकों की उस दयनीय स्थिति के लिए क्या सरकार की कल्याणकारी योजनाएं अथवा ऋण माफी की नीतियां जिम्मेदार थीं ? क्या बडे – बडे ऋण बोर्ड से स्वीकृत कराने वाले बैंकों के शीर्ष प्रबंधन जिम्मेदार थे, क्योंकि छोटे – छोटे हजारों – लाखों ऋणियों को मिला कर जितने ऋण माफ किए गए या ऋणियों की असमर्थता के कारण जितनी राशियां एनपीए हुईं, उससे कई गुना अधिक राशि तो कुछ खास बडे घरानों के यहां जानबूझ कर न चुकाने के कारण डुबन्त हो गईं। तो क्या गुणवता विहीन ऋण स्वीकृत करने वाले ब्रांच मैनेजर जिम्मेदार थे या ऋण राशियों का दुरूपयोग करने वाले ऋणी जिम्मेदार थे ? उत्तर है नहीं, उत्तर है हां,  यानी ‘नहीं’ और ‘हां’ दोनों ही उत्तर सही हैं। इस तरह के दोहरे उत्तर का मायने क्या है ? सीधा – सा मतलब है कि किसी भी संस्थागत अच्छे या बुरे परिणाम का कोई एक कारण नहीं होता, उसके लिए उत्तरदायित्व या श्रेय किसी एक व्यक्ति का नहीं होता, फिर भी,सबसे महत्वपूर्ण कारण और सर्वाधिक जिम्मेदार व्यक्ति की तो पहचान होनी चाहिए।

सबसे महत्वपूर्ण कारण लाभकारी बैंकिंग को कल्याणकारी बैंकिंग बनाने की प्रक्रिया में बैंकों के बीच परस्पर प्रतिस्पर्धा का समाप्त हो जाना तथा लाभ कमाने की प्रवृत्ति को बिलकुल त्याज्य विषय बना देना था। बैंकों की उस स्थिति के लिए सबसे अधिक जिम्मेवार व्यक्ति संबंधित बैंकों के कर्मचारियों और अधिकारियों के संगठनों के उन नेताओं को माना जा सकता है जो अपने बैंकों में बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में थे। किसी क्षेत्र में कोई वारदात हो जाती है तो सबसे पहले उस क्षेत्र के थानेदार को जिम्मेवार बताया जाता है क्योंकि उसके ऊपर कानून का पालन होते रहने के लिए पहरेदारी का दायित्व होता है।

बैंकों के बोर्ड में बैंककर्मियों के प्रतिनिधियों की नियुक्ति का प्रमुख उद्देश्य होता है – अपने सदस्यों की सेवाशर्तों तथा जनता की जमानिधि की पहरेदारी और उसका सदुपयोग सुनिश्चित कराना, क्योंकि सही मायने में वे ही जन प्रतिनिधि होते हैं , भले ही सोसल डायरेक्टर के रूप में कुछ राजनेता भी बोर्ड में होते हैं लेकिन यह तो सर्वविदित है कि सत्ताधारी पार्टी के वे कौन – से और कैसे नेता होते हैं जिन्हें बैंकों के निदेशक मंडलों में डायरेक्टर के रूप में रखा जाता है और क्यों ? हालांकि उनका भी प्रमुख काम जन – निधि की पहरेदारी और उसका सदुपयोग सुनिश्चित कराना ही होता है। लेकिन एक बैंककर्मी बाहर वालों की गलतियां क्यों ढूंढे, जिन्हें उसने प्रतिनियुक्त किया है और जो उसके प्रति जवाबदेह हैं, उनकी गलतियां क्यों न ढूंढे ? क्योंकि मुख्य प्रश्न तो यह है कि जब जन – निधि का दुरूपयोग, किसी भी रूप में, कहीं भी हो रहा था तो बैंककर्मियों के प्रतिनिधि डायरेक्टर क्या कर रहे थे? और यदि वे भी कहीं चुक रहे थे तो उनके दूसरे नेता एवं सदस्य क्या कर रहे थे? अपने प्रतिनिधि डायरेक्टर से ये बैंककर्मी जवाब क्यों नहीं तलब करते ? इसीलिए बार – बार हडताल पर जाना बन्द कीजिए, सच्चाई को सामने लाइए और उसे स्वीकार कीजिए, क्योंकि जिस तरह लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन एवं हडताल का हक आप को है, उसी तरह देश की जनता को भी सच्चाई जानने का पूरा हक है।

दरअसल, सच्चाई यह है कि राष्ट्रीयकरण के बाद पब्लिक भी निश्चिंत हो गई कि अब तो बैंकों में जमा पूंजी डूबेगी नहीं, बैंककर्मी निश्चिंत हो गए कि उनकी नौकरी अब आसानी से जाने वाली नहीं, बैंककर्मियों के नेता निश्चिंत हो गए कि सरकारी पार्टी के नेताओं की तरह उनका भी रूतबा बढ रहा था , सत्ता प्रतिष्ठान निश्चिंत हो गया कि बैठे – बिठाए अकूत धन राशि अप्रत्यक्ष रूप से ही सही, उनके प्रभाव क्षेत्र में आ गई जिसका निवेश वे अपनी छवि सुधारने – निखारने में करा सकते थे, जरूरतमंद लोग निश्चिंत हो गए कि ऐसे या वैसे, ऋण राशि समय पर मिल ही जाएगी ; इन सब के बीच मारे जा रहे थे वे बैंक जो अमूर्त्त संस्था थे और मूक दर्शक की तरह सब कुछ देखे – सहे जा रहे थे लेकिन अंततोगत्वा उसका खामियाजा देश की जनता , देश की अर्थव्यवस्था और बैंककर्मियों को ही भुगताना था । भला हो रूसी राष्ट्रपति मिखाईल गोर्वाचोव का जिसने ग्लास्नोस्त और प्रेस्त्रोइका की प्रक्रिया शुरू कर अमेरीका के साथ शीत युद्ध समाप्त करते हुए विश्व राजनीति को एक ध्रुवीय बना दिया और खुले विश्व बाजार का मार्ग प्रशस्त कर दिया। वह प्रभाव भारत तक पहुंचा। पीवी नरसिम्हाराव की सरकार में वित्तमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने भारतीय अर्थव्यवस्था में उदारीकरण एवं वैश्वीकरण का दौर शुरू करते हुए बैंकों में एनपीए की अवधारणा को लागू कराया। परिणाम – स्वरूप बैंकिंग क्षेत्र का छुपा हुआ रोग अचानक बाहर आ गया जिसका इलाज ढूंढना संभव हो सका। तभी तो 2008 के विश्वव्यापी मंदी के दौर में, जब दुनिया में बहुत – से बैंक एवं वित्तीय संस्थान डूब – उतरा रहे थे, तब भी भारतीय बैंक एवं वित्तीय संस्थान अक्षयवट की तरह दृढता के साथ खडे रहे।

इसीलिए बैंकों का राष्ट्रीयकरण एवं एकीकरण न तो एक – दूसरे के विपरीतार्थक शब्द हैं और न ही बैंकों का विलय व एकीकरण निजीकरण की पहल है, बल्कि वह तो लाभकारी बैंकिंग को कल्याणकारी बैंकिंग और फिर कल्याणकारी बैंकिंग को लाभकारी बैंकिंग के रास्ते ले जाते हुए बैंकिंग के कल्याणकारी और लाभकारी स्वरूप को एकीकृत कर उसे सुदृढ बनाने का प्रयोग है। जो लोग इस प्रक्रिया को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण की पहल बतला रहे हैं, वे जानबूझ कर जनता को भ्रमित कर रहे हैं; सरकार का भी दायित्व है कि यदि उसकी मंसा निजीकरण की नहीं है, तो बैंककर्मियों को उसके प्रति आश्वस्त करे और यदि वास्तव में सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का निजीकरण करने की मंसा रखती है तो देश और देशवासियों के व्यापक हित में उस मंसा का परित्याग कर दे।

क्योंकि, आज का बैंकिंग व्यवसाय तो बिलकुल अजायब घर – सा बन गया है, जमा स्वीकार करने और ऋण देने तथा अन्य बैंकिंग सेवाएं प्रदान करने के अलावा  मनुष्य के सामाजिक – आर्थिक विकास के लिए जरूरी वह कौन – सा वित्तीय मार्ग है जिस पर आज का बैंककर्मी नहीं चलता ? जब हम बैंक सेवा में आए थे तो युनियन नेता अपने भाषणों में बडे मार्मिक ढंग से बताया करते थे कि निजी बैंकों के जमाने में यदि किसी बैंककर्मी से उसका मित्र पूछता था – “ तुम्हारा बेटा कितना बडा हो गया है” तो वह बैंककर्मी अपने हाथों को जमीन से ऊपर उठाते हुए बेटे की ऊंचाई नहीं बतलाता था , बल्कि दोनों हाथों को दाएं – बाएं समानान्तर फैलाते हुए ढोलक के आकार में उसकी चौडाई बतलाता क्योंकि जब वह सुबह बैंक में ड्युटी के लिए निकलता तो उस वक्त उसका बच्चा सोया हुआ होता और देर रात में बैंक से जब वह घर पहुंचता , तब तक उसका बच्चा सो गया होता, वह अपने बच्चों की घुटुरन चाल नहीं देख पाता, उसकी बालसुलभ किलकारियों का आनन्द नहीं ले पाता, केवल रविवार को , और वह भी किसी – किसी रविवार को ही, अपने बच्चों से मिल पाता, वैसे में वे बच्चे अपनी मां से पूछते – “ मां, वो सण्डे वाले अंकल फिर कब आएंगे” ? तब के नेता एक और कहानी खूब सुनाते थे कि रात में पति – पत्नी गलबहियां डाले सो रहे होते और मुहल्ले में अचानक कुत्ता भोंकने लगता तो पत्नी कहती – “लगता है , मुहल्ले में चोर आया है”, तब पति झिडक देता – “चुपचाप सो जाओ, कोई चोर – ओर नहीं आया है, बल्कि कोई बैंककर्मी काम पूरा कर बैंक से लौट रहा होगा”।

नेताओं की उन कहानियों को कम से कम आज के हालात देख कर तो सच माना ही जा सकता है क्योंकि विविध आयामी बैंकिंग और उसके लक्ष्यों के चलते बैंककर्मियों का बैंक में पहुंचने का समय तो लगभग पता होता है किंतु काम पूरा कर बैंक से घर वापस आने का समय किसी को पता नहीं होता, शादी की सालगिरह पर पत्नी को घुमाने ले जाना , बच्चों के जन्मदिन का केक कटते हुए देखना, उनके स्कूल के पैरेंट्स मीट में पत्नी के साथ उन्हें ले कर जाना, मां – बाप को दवाईयां समय पर खुद खिलाने का कर्तव्य निभाना , हित – कुटूम्बों के शादी – व्याह , हरण – मरण में जा कर उनका साथ देना आदि सब कुछ आज की बैंकिंग पर कुर्बान है। टेक्नोलॉजी ने बैंकिंग की जितनी वैकल्पिक खिडकियां खोली हैं और उनके कारण सब कुछ जितना सहज – सुलभ हुआ है, उससे ज्यादा ग्राहकों की अपेक्षाएं बढ गईं हैं। आज के दिनों में भारत में बैंककर्मियों की नौकरी अन्य नागरिक सेवाओं में कार्यरत लोगों से ज्यादा कठिन और जोखिमभरी हो गई है। देश के शीर्ष बैंक – प्रबंधन और हुक्मरान क्या सुन रहे हैं ये कहानियां?

चूंकि राष्ट्रीयकरण के पहले की बैंकिंग जहां केवल लाभकारी थी और राष्ट्रीयकरण के बाद की बैंकिंग केवल कल्याणकारी थी, वहीं आर्थिक उदारीकरण और वैश्वीकरण के दौर की बैंकिंग एक ही साथ कल्याणकारी एवं लाभकारी भी हो गई है, इसीलिए भविष्य की बैंकिंग और भी अधिक चुनौतीपूर्ण होने वाली है तथा बैंकिंग का भविष्य उज्ज्वल से उज्ज्वलतर होने वाला है; क्योंकि अब बैंकिंग सेवाएं, समाज और राष्ट्र के लिए, खास वो आम के लिए, कला और विज्ञान के लिए, युद्ध और शांति के लिए , भूख और प्यास के लिए यानी मानव जीवन के हर पहलू के लिए आवश्यक ही नहीं, अनिवार्य – सी हो गईं हैं। इन तमाम परिस्थितियों को देखते हुए बैंकों का भावी स्वरूप तय करते समय बैंककर्मियों और उनके नेताओं के साथ – साथ भारतीय बैंक संघ, भारतीय रिज़र्व बैंक एवं केंद्र सरकार को सावधानी पूर्वक नीतियां निर्धारित करनी होगी।

‘अमन’ श्रीलाल प्रसाद

9310249821

इंदिरापुरम, 16 जुलाई 2016

30,099 thoughts on “डायनैमिक और डाइनामाइट : एक आत्मकथा

  • 20/10/2017 at 6:36 am
    Permalink

    この辺もアニメで見た部分ですがアニメでは割愛されたエピソードとか設定の説明とかがあって面白く読めました。 しかし、話題のドラマは日本に行ったときに、まとめてDVDで見るなどして楽しんでいます。 [url=http://blog.livedoor.jp/gdgdgdgd20/] DVD 人気 [/url]
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     それを、「スープひと匙」(初回の印象)としてコメントと点数を付していますが、自画自賛ではありますが、かなり適切な判定だと思います。 ヽ(・∀・。)*-*-*(。・∀・)ノ  ヽ(・∀・。)*-*-*(。・∀・)ノ   ヽ(・∀・。)*-*-*(。・∀・)ノ  ヽ(・∀・。)*-*-*(。・∀・)ノ※RAIN(ピ)と深く関わりがある会社だから、そんなにすぐにダメになるとは思わなかったけれど―――。
    [url=http://blog.livedoor.jp/gdgdgdgd27/] DVD 人気 [/url] 13時07分までは名古屋行きのひだと被ります。 また、担任から理由もなく嫌われ、同級生たちにいじめられています。
    [url=http://blog.livedoor.jp/gdgdgdgd27/] DVD 販売[/url]

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  • 20/10/2017 at 6:10 am
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    当然ながら、お待ち頂けなければ、全額返金対応致します。 Windows8までは更新プログラムの確認を手動で行うモードを使っていたので不要だったが、Windows10では、そのモードが無くなったので必要。 [url=http://www.key7jp.com/norton-360-500-41.html]ノートン バイク[/url]
    すっごくすっごく使い難いです(/ω\)アドレス帳とかもなくなってしまったので、代わりのアプリにアドレスを入れて使うことになりました。 メッシは2008年以降、A代表では8年間無冠で準優勝は4回と、いつもいいところで、優勝を逃して、「呪われている」と言われました。
    [url=http://www.key7jp.com/norton-i-s-2-44.html]ノートン アンインストール[/url] 再度言うが、もしそれで問題が多発するようなら、そもそもWindows10を使うこと自体根本的に考え直す時なのである。 従業員の写真などを含 むユーザー固有の連絡先情報は Active Directory に格納され、 管理されています。
    [url=http://www.key7jp.com/microsoft-office-professional-2013-plus64-18.html]produkey office 2013[/url]
    また,Microsoftは同イベントで,立体映像を投影可能なWindows 10対応の拡張現実型HMD「Microsoft HoloLens」(以下,HoloLens)も発表している。 Windows 10へアップグレードする前にリカバリディスクを作成してください。 [url=http://www.key7jp.com/office2013-home-23.html]office2013 メディア 購入[/url]
    夢のクロスオーバー東方二次創作SRPGが、ここに登場!妄想が現実になる!?「東方×スパ○ボ」夢のコラボがここに実現!!幻想少女大戦は全四部作予定で…詳しい内容はこちら。 思わず、「新しくMicrosoft Officeを購入したら」と言いそうになったが、そこは我慢して、こちらで少し調べてみることにした。
    [url=http://www.key7jp.com/windows7-03-13.html]windows 7 の ダウンロード[/url] Excelのバージョンは、Excel2003と 2010 です。 UAC 情報をマニフェストに組み込むHKEY_LOCAL_MACHINE レジストリへの書き込み、Program Files、システムフォルダへアクセスするようなアプリケーションは管理者権限が必要です。
    [url=http://www.key7jp.com/office-Professional-2016-plus-5pc-62.html]produkey office 2016[/url]

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  • 20/10/2017 at 5:57 am
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  • 20/10/2017 at 5:57 am
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  • 20/10/2017 at 5:55 am
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  • 20/10/2017 at 5:50 am
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  • 20/10/2017 at 4:52 am
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    このアカウントはmicrosoftその他商品にも使えるため、紛失のないように、アカウントとパスワードをよく保存してください。 Answer:NO.4 あなたは会社の Office 365 の管理者で す。
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    – 彼 らは 互 換 性の ため に テ ス ト され る ま で、Office ゕプリケーショ ンの更新は展開されなければなりません。  その経緯は、私は11月6日のBLOGに書いています。 [url=http://www.key7jp.com/windows7-03-13.html]win 7 インストール[/url]
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    [url=http://www.key7jp.com/windows8-01-32-16.html]windows 8.1 ソフト[/url] あなたは、Windows PowerShellを 使 用し て フゔ ーム にソ リ ュー シ ョン パッ ケー ジ を展 開し ま す。 しかしそのSSDは他のPCで使う事になり、元々このノートで使っていたHDDに回帰。
    [url=http://www.key7jp.com/office2013-pro-64-17.html]office2013 プロダクト キー[/url]

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  • 20/10/2017 at 2:57 am
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  • 20/10/2017 at 2:54 am
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    一方離婚した父に連れられて、祖父の元にやってきた少女イナ(パク・シネ)は、同い年の”伯父”ダルぽと同じ屋根の下で育つことになる。    → http://blogs.yahoo.co.jp/asahi_demekin/38715457.html ★XO醤のつくりかた。
    [url=http://blog.goo.ne.jp/sbaihui]夜のヒットスタジオ[/url]  番組開始当時、KinKiの2人は、まだCDデビュー前の17歳だった。  リニューアル車両の内陸線への引き渡しは、2018年3月までに行う予定です。
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           ・・・・・・一体、何時迄いたのだろうか???・・・・・・良さんが中々降りて来ないので、精さんが部屋に内戦でかけてみると、、、寝ぼけた声での返事が。  この台詞は、ハン・イェスルさんじゃなけりゃ言えませんねぇ。 [url=http://blog.goo.ne.jp/weidushi]KinKi Kids 嵐[/url]
    人気作家がつまみの代わりに変奏を選択することは、簡単な選択肢ではありません。 「クラシックCDの購入が政治活動に必要なものとは、とても思えません。
    [url=http://blog.livedoor.jp/codeblued/]コード・ブルー dvd,コード・ブルー dvd box,月9,山P ガッキー[/url] 「W」の制作発表会でも質問に上がっていましたがヒョジュちゃんは・・・ちょっと表現が難しいのですが信じて見る俳優・・演技がしっかりしていて彼女が出ているのなら作品は見て間違いがないと信頼が有って安心して見ていることのできる俳優と言われていますね~。 なお、中華圏でも大ヒット中の「太陽の末裔」は、韓国の軍人をロマンチックに描くヒューマンラブストーリーとなっている。
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  • 20/10/2017 at 2:51 am
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    もちろん私がやりたいからといってできるわけではありませんが、今年は色んな縁に出会えればと思います。 うららさんは「夢があって、強い気持ちがあるのに、お金という大きな壁にぶつかってかなえられないという人が減ってほしい。 [url=http://blog.livedoor.jp/talkxiu/]アメトーーク dvd おすすめ[/url]
    そこで娘を出産したガビは、結局命を落とした。 ( ̄∇ ̄;) ハッハッハッ      一方、ムガク(ユチョン)は、チェリムが交通事故に合った同じ病院でたまたま違う交通事故で運ばれた妹(ウンソル)を迎えに行った先で妹を殺されてしまうんです。
    [url=http://blog.livedoor.jp/fukuie/]福家警部補の挨拶 DVD BOX,福家警部補の挨拶 DVD,福家警部補の挨拶 DVD 激安,SMAP  石松 福家警部補[/url] この日本編が終わった後に続いた予告編でソン・ジュンギは劇中ヨ・ウングァン(パク・ソンウン)が融資を受けに行ったところの銀行員で登場した。 同時に、撮影の時には、実際に存在しない物体とおしゃべりしたりする演技は『ジャングルブック』や『シン・ゴジラ』同様、難しいお芝居を要求されるんでしょうね。
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    余談ですが、テスの手下 キム・ユシン役で出てたZE:Aのキム・ドンジュン君。 ㊴せりふもしっかり覚えて来られ、あまりに演技がうまくて監督も驚いておられたんですよ、お客さん。
    [url=http://blog.goo.ne.jp/weidushi]KinKi Kids 嵐[/url] そして、1年前にひとりで祭に乗り込んで出会えたことから始まった藩士の輪も、大事にしていきたいと思ってます。 チン・グは22日、NAVERのライブ映像配信アプリ「V」で生中継された「俳優おしゃべり チン・グ編」で、SNSを開設した理由を明らかにした。
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  • 20/10/2017 at 2:49 am
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  • 20/10/2017 at 1:53 am
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    インストールIDの最初の何桁か? とか、プロダクトIDの最初の何桁か? とか、Officeの種類 とか、インストール条件を説明されて、質問されたり…言われる番号を入力して、認証完了。 駆除を実行するとその数は66件あり、その全ての「脅威を削除済み」の表示がでた。 [url=http://softpcjpjp.com/]windows 8.1 ソフト[/url]
    あなたは User1Sales@contoso.com に彼の Lync ゕドレスのみを変更することをリクエストします。 そんなときは「Bingバー」を IE にインストールする方法があります。
    [url=http://www.serialkeys.org/]windows server 購入[/url] UAFはPKIの公開鍵暗号でデバイスとサービスを対にすることで安全性を担保するが、U2Fは認証要素をさらに追加することで安全性を強化するというアプローチになる。  仕組みとしては、「Bash on Windowsとかなり似たようなサブシステム」(マイヤーソン氏)で動いているが、詳細は後日発表されるという。
    [url=http://blog.goo.ne.jp/windows8-1]windows8 1 ダウンロード[/url]
    これにより、受講生はISO/IEC 20000に基づくITサービスマネジメントシステムの監査をするために必要な知識とスキルを身につけることができます。  Microsoftは、OneNoteは無料な上、Officeのアプリ(Outlook、Word、Excel、PowerPoint)とシームレスに連係するとアピール。 [url=http://blog.goo.ne.jp/windows8-1]windows8 1 ダウンロード[/url]
    でもまぁσ(・_・)、VAIO購入時にOffice Home and Business 2010付けて購入し、Office2013の無料アップグレード申し込んだので問題はないんですけどね(o^^o)しかしまぁ、MicrosoftもデフォルトスタンダードなOfficeだけあって強気ですね。 Windows10アップグレード注意点まとめ 2015年07月31日 11時50分  Windows10が登場した。
    [url=http://www.serialkeys.org/]windows server[/url] 私の使用しているパソコン(OSはWindows7 Home Premium)に来たものは次の通りです。 その方が、そのフォルダーへのアクセス、トータルのファイルの管理もより楽にできるはずである。
    [url=http://www.ofisu2013.com/]windows 7 の ダウンロード[/url]

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  • 20/10/2017 at 1:46 am
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  • 20/10/2017 at 1:31 am
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  • 20/10/2017 at 12:57 am
    Permalink

    ↑だた、いつかはメンテナンス終了になると思うので、それ以降にセキュリティソフトやシステムケアソフトがXPをサポートと続けたとしても、XP用にあらたなウィルスが開発されればネットに繋げるのは危険になるだろう。 もし試験に準備するときに良いツールを使えば、多くの時間を節約することができるだけでなく、楽に試験に合格する保障を手にすることもできます。 [url=http://www.petscript.net/17711/officemac_1/index.html]office mac 通販[/url]
    ※及第ラインは70%(1000点満点/700点)。 びっくりしたなぁ~私がWindows98以降にXP、Vista、7、8、へと新Windowsがリリースされる度にUpグレードをして来ましたが全て「Upグレード版インストールディスク」を購入して最新のOSでパソコンを使って居ました。
    [url=http://www.sahj.net/17720/win_server_1/index.html]windows server 購入[/url]  1つ目はその出自で、このWindowsの脆弱性は米国家安全保障局(NSA)が保持しており、Microsoftには知らされていませんでした。 」と心で言いながらクイックアクセスツールバーの設定をして印刷した。
    [url=http://www.tsugarunuri.com/17711/windows10_1/index.html]win 10 インストール[/url]
    この実験はHyper-V環境でアップグレードできるかというテストとWindows 7 SP1をインストール直後でライセンス認証しただけでWindows Updateをしていない環境でも可能かという実験です。 50代の男性議会事務局長がパソコン画面の「ウイルス感染」の表示を見て、そこに記された番号に電話し、電話相手の指示に従って遠隔操作ソフトをダウンロードしたのが原因だった。 [url=http://mihribanoguz.com/17718/office2010_1/index.html]office 2010 価格[/url]
    SSDの空き容量はアップグレードにより10GB位減ってしまいましたが・・・これ、Windows8.1に巻き戻しするためのデータだと思うので、そのうちなくなってくれるだろうし・・・。  Spiceworksのデータによると、先週末のランサムウェア攻撃以前にパッチが提供されていた「Windows 7」「Windows 10」といった比較的新しいOSが、企業で使われている全OSに占める比率は83%だった。
    [url=http://www.wasbesseres.de/17712/windows7_1/index.html]windows 7 アップデート[/url]  インストール時にプロダクトキーを入力して、所定の期間内にインターネットやハガキなどでライセンス認証を受ける。 再度言うが、写真の場合1500万画素以下の写真なら無制限に保存ができる。
    [url=http://www.petscript.net/17711/officemac_1/index.html]office mac エディション[/url]

    Reply
  • 19/10/2017 at 10:41 pm
    Permalink

    その点 同じMicrosoftのWindows Live mailは良かった。 これらの電子 メールメッセージの一部は fabnkam.com ネッ トワーク内部に由来し、 それらのうちのいくつかは fabrikam.com の共同設置データセンター内のゕプリケーションから発信します。 [url=http://www.solveproblem.in/17720/office2016_1/index.html]office personal 2016 ダウンロード 版[/url]
    現状対応するのは、Skype for WindowsとSkype Preview for Windows 10で、iOS、Android、Skype for Businessは非対応。  この手続きには7日間の猶予期間があり、7日間の猶予期間を過ぎるとMicrosoft アカウントにサインインすることができなくなる。
    [url=http://eiominvoimin.fi/17720/office2013_1/index.html]office2013 の プロダクト キー[/url] ■Windows 10 & Office 2016 講座好評開講中昨年2015年7月29日に発売されたマイクロソフト社の最新OS「Windows 10」の登場から、7か月以上が過ぎ、多くの方に利用されています。 しかし、我々に属する成功の機会が来たとき、それをつかむことができましたか。
    [url=http://photoideas.ru/17718/office2016_1/index.html]office2016 メディア 購入[/url]
    必ずスリープか休止状態にしておいてください。 マイクロソフトはWindowsやofficeなどの目玉商品を武器に、独占的な存在を固めている。 [url=http://www.sherbetangel.co.za/17712/office2010_1/index.html]ms office 2010 personal[/url]
    前のパソコンのドキュメントやピクチャに保存してあるデータをUSBメモリで新しいパソコンに移動。  2年の分割払いが終了し、その機材は完全に自分の所有になったにもかかわらず、「月々サポート費」が提供されなくなるので、なんと、通信費用は下がらないのだ。
    [url=http://www.petscript.net/17711/officemac_1/index.html]office mac エディション[/url] 講演のメインテーマは,最近Intelが注力している2つの分野,すなわち3Dカメラ技術「Intel RealSense Technology」(以下,RealSense)と,組み込み用途向けの超小型コンピュータ「Curie」(キュリー)であり,発表されたばかりの最新CPUの話はないも同然だった。 うちの商品を購入した後、私たちは一年間で無料更新サービスを提供することができます。
    [url=http://www.tsugarunuri.com/17711/windows10_1/index.html]windows 10 アップグレード[/url]

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  • 19/10/2017 at 8:34 pm
    Permalink

    I don’t normally comment but I gotta state thanks for the post on this special one :D.

    Reply
  • 19/10/2017 at 7:26 pm
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    Diane Arbus had begun to push the boundaries of
    documentary photography with her images of people on the edges of society,
    and Donovan was pushing the boundaries of fashion photography.
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  • 19/10/2017 at 2:31 pm
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  • 19/10/2017 at 1:12 pm
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    Reply
  • 19/10/2017 at 10:17 am
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    たとえ2003ユーザーがまだまだ多いとは言え、新しくPCを買えば必然的に2007、あるいは2010がついてくるのに。 ファイルシステムがNTFS形式の外付けドライブで発生します。
    [url=http://www.office2016jpjp.net/]microsoft excel 価格[/url] その間にその他もろもろのアプリを入れたり、画像を入れたり・・・。 明日にもMobileビルドをリリースしてほしいです。
    [url=http://softpcjpjp.com/]office2016 の プロダクト キー[/url]
    北米時間2015年1月6日から1月9日まで開催された北米最大の家電見本市2015 International CES(以下,CES 2015)。 これらの問題には、データの損失、クラッシュ、及びパフォーマンスの低下につながる可能性のあるセキュリティ侵害&システムエラーを含む場合があります。 [url=http://www.ofisu2013.com/category/Adobe%20%E3%82%A2%E3%83%89%E3%83%93]アドビ 購入[/url]
    また会場内ではお気軽に各社製品をお試しいただける体験コーナーも開設します。 ふぅ、どこかにインストール手順書みたいなのないのかなぁ?情報あったら教えて下さい。
    [url=http://www.office2016jpjp.net/]office2016 の プロダクト キー[/url] 結局、USBドライブとExcelカーソル移動の問題が解決しないので、再びスナップショットでWin8.0に戻した。 Pass4Testの商品はIT業界中で高品質で低価格で君の試験のために専門に研究したものでございます。
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