शत-शत बधाइयां, कोटिश: आभार

शत-शत बधाइयां, कोटिश: आभार

शत-शत बधाइयां, कोटिश: आभार
भारत के राष्ट्रपति माननीय श्री प्रणब मुखर्जी के कर – कमलों से विज्ञान भवन में इंदिरा गांधी राजभाषा पुरस्कार प्राप्त कर मैं अभी-अभी घर लौटा हूं और आप से बातें कर रहा हूं।
पंजाब नैशनल बैंक को लगातार दूसरे वर्ष इंदिरा गांधी राजभाषा पुरस्कारों में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है, इसके लिए पीएनबी परिवार के सभी साथियों को हार्दिक बधाइयां।
भारत सरकार ,गृह मंत्रालय,राजभाषा विभाग द्वारा विज्ञान भवन ,नई दिल्ली में 15 नवम्बर,2014 को राजभाषा समारोह का आयोजन किया गया। समारोह के मुख्य अतिथि थे माननीय श्री प्रणब मुखर्जी, राष्ट्रपति, भारत । मंच पर गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह, गृह राज्यमंत्री श्री किरण रिजीजु, राजभाषा विभाग की सचिव सुश्री नीता चौधरी आईएएस , संयुक्त सचिव श्रीमती पूनम जुनेजा तथा सभागार में केन्द्र सरकार के कार्यालयों, उपक्रमों, बैंकों आदि के शीर्ष कार्यपालक एवं राजभाषा प्रभारी विशेष रूप से उपस्थित थे । समारोह में वर्ष 2013-14 के इंदिरा गांधी राजभाषा पुरस्कार प्रदान किए गए । Read more

शुक्रिया

शुक्रिया

शुक्रिया उन सबका , जिन्होंने देश और देशवासियों के सर्वांगीन विकास के लिए प्रतिबद्ध महान बैंकिंग संस्थाओं में अग्रणी पंजाब नैशनल बैंक में 35 वर्षों से अधिक की सम्मानजनक सेवा पूरी कर 31.10.2014 को पीएनबी परिवार ही नहीं, देश का वरिष्ठ नागरिक बनने पर मुझे बधाइयां देते हुए स्वस्थ-प्रसन्न और सक्रिय जीवन की शुभकामनाएं दी हैं । इस सेवाकाल में 08.10.1979 से 04.09.1993 तक न्यु बैंक ऑफ इंडिया, जो बैंकों के राष्ट्रीयकरण के दूसरे चरण में 15 अप्रैल 1980 को राष्ट्रीयकृत हुआ था और जिसका 04.09.1993 को पंजाब नैशनल बैंक में विलय हो गया ) का कार्यकाल भी शामिल है;परन्तु 21.03.1977 से 06.10.1979 तक देश के प्रथम क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक – चम्पारण क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक का सेवाकाल शामिल नहीं है। 19 दिसम्बर, 1973 से 24.06.1974 तक एक हाई स्कूल में हिंदी शिक्षक के रूप में, और उसके महीनों बाद बिहार सरकार में एक सप्ताह का कार्यकाल बिलकुल अलग विषय है । बिहार सरकार की नौकरी मैंने स्वेछा से छोडी थी और हाई स्कूल वाली नौकरी मैंने स्वेछा से छोडी थी या छोडने के लिए मुझे कहा गया था या मुझसे छुडा ली गई थी ( इस विषय पर फिर कभी विस्तार से बातचीत होगी ) , यह अलग मीमांसा का विषय है,परंतु दोनों के मूल में एक ही कारण था और वह था जेपी आन्दोलन से मेरा लगाव । Read more

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