डायनैमिक और डाइनामाइट : एक आत्मकथा (पीएनबी और एबीसीडी)

बंगलोर, 31 अक्टूबर 2015

( “ पंजाब नैशनल बैंक में सीएमडी के रूप में मैं ने कुछ ही दिनों पहले ज्वाईन किया है। देश के  बडे,  प्रतिष्ठित और अग्रणी राष्ट्रीयकृत बैंक – परिवार का मुखिया बनाए जाने पर मुझे बहुत खुशी हो रही है। आप के संगठन द्वारा मेरे स्वागत और अभिनन्दन के लिए इस बडी सभा का आयोजन किया गया है। यह सभागार पीएनबी दिल्ली – एनसीआर में कार्यरत साथियों से खचाखच भरा है, आप मुझे इतना प्यार और आदर दे रहे हैं ! मैं इसे अपना सौभाग्य मानता हूं कि अगले पांच साल तक मुझे आप जैसे साथियों के साथ काम करने का अवसर मिलेगा । परंतु , मैं माफी मांगते हुए यह भी कहना चाहता हूं कि इस स्वागत और सम्मान  से मुझे बिलकुल खुशी नहीं मिल रही है, बल्कि उसके विपरीत मैं खुद को शर्मिंदा महसूस कर रहा हूं। आप सोचेंगे कि ऐसे मौके पर मैं कैसी बातें कर रहा हूं? आप को मेरी बातों से आश्चर्य हो रहा होगा ! आप इसका कारण जानना चाह रहे होंगे?  साथियो, मेरे हाथ में एक पत्र है , बैंक के एक सम्मानित ग्राहक ने मुझे यह पत्र लिखा है, मैं इसे पढ कर आप को सुनाता हूं, मेरे दु:खी और शर्मिंदा होने का कारण आप खुद ब खुद समझ जाएंगे ”……..? )

आत्मकथा के इसी अंश से …….

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‘आईए, बांटे अनुभव’

बंगलोर , 27 अक्टूबर 2015 ।

                                ‘आईए, बांटे अनुभव’

31 अक्टूबर 2015 को मेरी आत्मकथा का वह अंश आप पढ सकेंगे जो विशेष कर पीएनबी में मेरे महत्वपूर्ण अनुभवों में से एक है, प्रसंगानुसार उसमें और भी अन्य अनुभव होंगे।

वह हर एक प्रबुद्ध व्यक्ति के लिए उपयोगी होगा , बैंकरों के लिए ज्यादा उपयोगी होगा,  राजभाषा से जुडे ( चाहे वे किसी भी संस्था में हों) लोगों के लिए और भी ज्यादा उपयोगी होगा ; पीएनबी परिवार के साथियों के लिए विशेष उपयोगी होगा और  पीएनबी में राजभाषा से जुडे साथियों के लिए तो विशेष रूप से विशेष उपयोगी होगा ।

उसे मेरे ब्लॉग: shreelal.in के अलावा मेरे फेसबुक: shreelal prasad तथा फेसबुक पेज: shreelal Prasad ‘Aman’  पर देखा जा सकेगा ।

सबका स्वागत ! सबका अभिनन्दन !!

 श्रीलाल प्रसाद

9310249821

डायनैमिक और डाइनामाइट : एक आत्मतकथा

इंदिरापुरम, 18 अक्टूबर2015

मेरे नाती कुमार श्रेष्ठ को
जन्मदिन की हार्दिक बधाइयां और आशीर्वाद

मेरा नाती कुमार श्रेष्ठ आज 18 अक्टूबर, 2015 को पूरे एक वर्ष का हो गया । बधाईयां !
उसका जन्म दिल्ली ज़ामिया हमदर्द हॉस्पिटल में वर्ष 2014 के 17 अक्टूबर की ढलती रात यानी 18 अक्टूबर को प्रात: 2 बज कर 10 मिनट पर हुआ था ।

मेरी बडी बेटी शिल्पाश्री एमए – मास्कॉम (गोल्ड मेडलिस्ट) और दामाद श्री सुमित कुमार मैनेजर , भारतीय स्टेट बैंक
(गुजरात सर्कल में पदस्थापित ) का यह प्रथम पुत्र कुमार श्रेष्ठ अपनी बाल सुलभ गतिविधियों से अनायास ही सबको
आकर्षित कर लेता है।

मैं हिंदी साहिय का विद्यार्थी रहा हूं, एमए में मेरा स्पेशल पेपर था ‘सूर साहिय ’ । ‘सूर सागर’ का गहन अध्ययन – मनन करने का सुअवसर मुझे मिला है और उस अध्ययन के दौरान कृष्ण की बाल लीलाओं का भी सूक्ष्म अध्ययन किया है। बाल मनोविज्ञान मेरा मनोवांछित विषय है , मुझे अपने तीनों बच्चों – पुत्र कुमार पुष्पक, पुत्री शिल्पाश्री और शिप्रा – के बचपन की एक – एक भंगिमा और गतिविधि याद है, आज उनके बच्चे मेरे आह्लाद के अवयव हैं। बेटे पुष्पक का बेटा मेरा पोता अपूर्व अमन भी 10 माह का हो गया है और मैं पत्नी के साथ आजकल बंगलोर में नैसर्गिक पौत्र सुख एवं आनन्द का उपभोग कर रहा हूं।

कुछ ही दिनों पहले मैं पत्नी पुष्पा प्रसाद के साथ बेटी, दामाद और नाती के पास एक सप्ताह गुजरात में था , नाती श्रेष्ठ की बाल लीलाएं और किलकारियां कृष्ण के वज़ूद को साकार बना रहीं थीं, उसका घुटुरन चलना , हमें दिखा कर तेज चलना, फिर गिर पडना, रुआंसा मुंह बनाना, रोना , थोडी – सी पुचकार के बाद फिर दौड लगाने लगना, गोद में आकर उछलना , सब कुछ अलौकिक !

बेटे के पास रहने पर पौत्र सुख और बेटी के पास रहने पर दौहित्र सुख , मेरे सेवानिवृत्त जीवन की सर्वोत्तम एवं सर्वश्रेष्ठ उपलब्धियां हैं। अगर पूर्व जन्म होता है तथा पिछले जन्म के कर्मों के फल अगले जन्म में मिलते हैं तो निश्चित रूप से पिछले जन्म में हमने बहुत ही अच्छे कर्म किए होंगे , जिनके सुफल के रूप में मेरे तीनों बच्चे और फिर नाती – पोता प्राप्त हुए हैं । हम इसके लिए ईश्वर के कृतज्ञ हैं।

बेटा कुमार पुष्पक बंगलोर में एक एमएनसी में मैनेजर हैं तथा छोटी बेटी शिप्रा कॉग्नीज़ेंट और दामाद अभिषेक आर्यन आईबीएम में बंगलोर में ही सॉफ्टवेयर ईंजीनियर हैं। आजकल मैं , पत्नी पुष्पा , बेटा पुष्पक , बहू आरती पुष्पक, पोता अपूर्व अमन , छोटी बेटी शिप्रा और दामाद अभिषेक , सभी बंगलोर में साथ हैं, आज हम सब श्रेष्ठ का जन्मदिन गुजरात में एक साथ मना रहे होते किंतु अभिषेक जी को डेंगु हो जाने के कारण हम लोग वहां नहीं जा सके ; ऐसे में बडी बेटी शिल्पा, दामाद सुमित और नाती श्रेष्ठ बहुत याद आ रहे हैं, खास कर नाती के आज जन्मदिन पर।

हम सभी ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि कुमार श्रेष्ठ को सुदीर्घ स्वस्थ सुखमय स्नेहिल निर्विघ्न आनन्दमय जीवन प्राप्त हो और वह अपने जीवन में हर कदम पर अपार सफलता, सुनाम व सम्मान प्रात करे ।

बेटी शिल्पा और दामाद सुमित कुमार को मेरे नाती के सुचारू रूप से लालन – पालन के लिए बधाइयां व धन्यवाद ।

श्रेष्ठु बाबू को नाना – नानी , मामा – मामी , मौसा – मौसी के ढेर सारे आशीर्वाद और उनके छोटे भाई अप्पू बाबू की ओर से हार्दिकक शुभकामनाएं …

Shreelal Prasad's photo.

डायनैमिक और डाइनामाइट ( विरोध का स्वर बेसुरा क्यों )

बंगलोर, 16 अक्टूबर 2015

विरोध का स्वर बेसुरा क्यों

( “ वे साहित्यकार ऐसा केवल इसलिए कर पाते हैं कि हमारे देश में ऐसा करने देने की आज़ादी है, वरना वे पडोसी देश में जा कर वहां का नागरिक बन कर ऐसा नाटक करें, टुकडे – टुकडे काट डाले  जाएंगे ” । “  आखिर विरोध का स्वर इतना बेसुरा क्यों है? … मेरी समझ में  ….. देश – दुनिया के मौज़ूदा हालात देख – सुन कर ऐसा लगता है कि ……..  बडी – बडी घटनाओं पर बडे – बडे लोगों द्वारा छोटी – छोटी बातें धीमे –धीमे बोलने और छोटे – छोटे विषयों पर छोटे – छोटे लोगों द्वारा बडी – बडी बातें ऊंचे – ऊंचे स्वरों में बोलने की प्रवृत्ति क्या देश – दुनिया को गृहयुद्ध और विश्वयुद्ध के दलदल में धकेल नहीं देगी ?” )  इसी आलेख से …… !       

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डायनैमिक और डाइनामाइट

तुम मुझे गुजरात दो, मैं तुम्हें…..?  – 2

बंगलोर 11 अक्टूबर 2015 ;

( जी , जहांपनाह ! हम कुबूल करते हैं कि हमारा क्षेत्र पिछडा है, हमारा सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक स्तर भी पिछडा है, हम खुद भी हर तरह से पिछडे हैं , क्योंकि आज भी हमारे यहां बेटा पैदा होना परिवार में जन – बल , धन – बल में बढोत्तरी और विरासत के रखवाले  का आना माना जाता है तो  बेटी का पैदा होना भी परिवार में लक्ष्मी का आगमन माना जाता है और बहु का आना सम्मान – स्वाभिमान – सौभाग्य व वंश वाहिनी का शुभागमन समझा जाता है। हम इस हद तक पिछडे हैं हुजूर कि आज भी हम कन्यादान को मोक्ष प्राप्ति का मार्ग मानते हैं और जिसके बेटी नहीं है वह अपने किसी रिश्तेदार या पडोसी की बेटी का व्याह कराने या उसके व्याह में अपनी क्षमतानुसार तन – मन – धन लगा कर कन्यादान करने का सुख मांगता है, बुडबक लोग हैं हम,  जो कन्या – हत्या न कर कन्यादान को सर्वोच्च पुण्य मानते हैं। हुजूर – ए – आला ! हम सिर्फ पिछडे ही नहीं हैं , बल्कि हम तो अपने बृद्ध मां – बाप, दादा – दादी को बृद्धाश्रम न भेज कर उनकी सेवा – सुश्रुषा को ही चारोधाम मानने के घोर पापी भी हैं, इसीलिए हम जैसे जाहिलों – काहिलों,  भूखे – नंगों और गरीब – गुरबों  की आप जितनी भी निंदा करें, हम पर जितनी भी लानत – मलामत भेजें, वह मुनासीब है हुजूर और आपके ओहदे व बडप्पन के मुताबिक भी है, माई – बाप  ! ) इसी आलेख से …..

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डायनैमिक और डाइनामाइट

तुम मुझे गुजरात दो, मैं तुम्हें………..?
(गांधी जयंती पर विशेष)

( मुझे लगता है कि यदि नेताजी आज़ाद हिन्दुस्तान में भी वर्षों तक जिन्दा रहे और चुप रहे, गुमनाम रहे तो इसका अर्थ यह नहीं कि उन्हें नेहरू ने सामने नहीं आने दिया, बल्कि उसका कारण केवल यही हो सकता है कि नेताजी को इत्मीनान था कि देश नेहरू जैसे सशक्त और सुयोग्य नेतृत्व के हाथों में सुरक्षित है, प्रगति पथ पर है और ऐसे में देश को किसी वैकल्पिक नेतृत्व की जरूरत नहीं है…… )

बंगलोर , 02 अक्टूबर 2015

मैं यहां किसी के समर्थन या किसी के विरोध में नहीं लिख रहा । इस आलेख में कई बडे नाम आएंगे, नामों का उल्लेख प्रसंगानुकूल संदर्भों को स्पष्ट करने के लिए ही होगा , किसी को भी किसी के भी बरक्श देखने की मंशा जताने के लिए नहीं । इस आख्यान को उनमें से किसी से भी किसी का भी तुलनात्मक अध्ययन न माना जाए और न ही किसी की निंदा या किसी की प्रशंसा समझी जाए, इसे मात्र ऐतिहासिक , भौगोलिक , सामाजिक , सांस्कृतिक एवं वैचारिक तथ्यों का पुनर्प्रस्तुतीकरण माना जाए ।
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वैचारिक पूर्वग्रह के कारण महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सुभाष चन्द्र बोस, भीमराव अम्बेदकर, राम मनोहर लोहिया, जय प्रकाश नारायण, इंदिरा गांधी, कर्पूरी ठाकुर , विश्वनाथ प्रताप सिंह, मनमोहन सिंह , नरेन्द्र भाई मोदी, लालू प्रसाद यादव, नीतीश कुमार, राम विलास पासवान , मुलायम सिंह यादव, शत्रुघ्न सिन्हा, अरविंद केजरीवाल, अमर सिंह तथा बिहार, गुजरात, महाराष्ट्र , दिल्ली, हरियाणा आदि को कई बार, कई जगह, कई लोगों द्वारा संदर्भों से काट कर देखा – परखा – समझा गया है जिसके चलते पूर्वग्रही विचारों की दीमक ने राजनीति के पिछले दरवाजे से प्रवेश कर समाज के अगले दरवाजे को खोखला करने में खतरनाक भूमिका निभाई है।
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