डायनैमिक और डाइनामाइट : एक आत्मकथा

डायनैमिक और डाइनामाइट : एक आत्मकथा
 जो आदमी सत्य को नकारता है , वह ईश्वर को मानने का ढोंग करता है
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साबरमती आश्रम , 30 जनवरी 2016

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की आज 69वीं पुण्यतिथि पर अविरल श्रद्धांजलि !

 

बापू, आपने तो अपने तीन बन्दरों को तीन सीखें ही दी थीं – “ बुरा मत देखो , बुरा मत कहो , बुरा मत सुनो” क्योंकि आप जानते थे कि वे बन्दर लिख और पढ नहीं सकते थे।

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डायनैमिक और डाइनामाइट : एक आत्मकथा

पत्थर की मूरतों में समझा है तू खुदा है

मुझको तो वतन  का  हर  जर्रा देवता है

 

साबरमती:अहमदाबाद, 26 जनवरी 2016

 

विश्व के विशालतम लोकतांत्रिक गणतंत्र की 66वीं वर्षगांठ के अवसर पर देश – विदेश में रहने वाले समस्त भारतीयों को

हार्दिक शुभकामनाएं ! अभिनन्दन !!

आदि और अंत की साक्षी सर्वोच्च सता में आस्था और अपने कर्मों में विश्वास रखना ही आत्मसम्मान है, खुदी है, इबादत है ; वैसे बन्दे को खुदाई सौगात के लिए किसी बाबा की दुआ–अरदास की दरकार नहीं, तांत्रिक – मांत्रिक की कृपादृष्टि की जरूरत नहीं , खुदा अपने नेक बन्दे की मुरादें खुद ही पूरी कर देता है, फिर भी, आस्था और विश्वास को कर्म में उतारने का काम तो बन्दे को ही करना होता है। अल्लमा इकबाल का वह शेर या फिर यह शेर –

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डायनैमिक और डाइनामाइट

 

(कदम–कदम बढाये जा, खुशी के गीत गाये जा ये

ये  ज़िन्दगी  है कौम  की,  कौम  पे लुटाये जा)

 

साबरमती, 23 जनवरी 2016

भारत माता के महान सपूत अमर स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जयंती के अवसर पर

हार्दिक शुभकामनाएं !  बधाइयां !!

गांधी जयंती 02 अक्टूबर 2015 को अपने ब्लॉग shreelal.in और फेसबुक पर भी मैंने उस समय बिहार में होने वाले चुनाव के परिप्रेक्ष्य में गांधी, नेहरू, अम्बेदकर, सुभाष , जय प्रकाश आदि जैसे महान नेताओं को याद करते हुए आज के कुछ नेताओं के बारे में भी ऐतिहासिक तथ्यों के आलोक में अपनी टिप्पणियां पोस्ट की थीं, देश के एक नामी हिंदी दैनिक समाचारपत्र, जिसके कई संस्करण कई राज्यों से प्रकाशित होते हैं, में आज के सम्पादकीय पृष्ठ पर नेताजी जयंती पर एक आलेख छपा है, मुझे लगता है कि उस आलेखकार की मूल सोच मेरी उसी टिप्पणी से प्रेरित है।

चूंकि पारिवारिक कर्त्तव्यों के निर्वहन में अभी मेरा ज्यादातर समय अस्पताल में बीत रहा है, इसीलिए मेरा आग्रह है कि नेता जी के स्मरण में 02 अक्टूबर वाले मेरे ब्लॉग या फेसबुक पोस्ट में नेताजी वाला अंश देखा जाए, यदि पूरा आलेख भी पढने का समय निकाल लिया जाए तो मेरी सोच का तथ्यात्मक मूल्यांकन भी किया जा सकेगा।

ऐसे में , जाहिर है, आत्मकथा की अगली कडी आने में कुछ समय लग सकता है। तब तक के लिए आज़ाद हिंद फौज़ का अभियान गीत गुनगुनाते रहा जाए … कदम – कदम बढाये जा…. !

जय हिंद !

‘अमन’ श्रीलाल प्रसाद

9310249821

डायनैमिक और डाइनामाइट : एक आत्मकथा

 

(एक कोशिश ग़र कशिश बन जाए तो फिर बात बने)

इंदिरापुरम, 16 जनवरी 2016

 

दुष्यंत ने ही कहा है ` –

“  सिर्फ हंगामा खडा करना मेरा मकसद नहीं

मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए

मेरे सीने  में नहीं   तो  तेरे सीने में सही

हो कहीं भी आग लेकिन आग जलनी चाहिए ”

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एचआरडी के डीजीएम जीएस दुबे के चेम्बर के बाहर रखे सोफे पर बैठ कर मैं 7वें तल से उनके आने का इंतज़ार कर रहा था। उनके चेम्बर में प्रवेश करते समय अतीत के झरोखे से मैं नीचे उतर आया था, चेम्बर से बाहर सोफे पर प्रतीक्षारत मेरा मन फिर से खयालों में खो गया…

 

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डायनैमिक और डाइनामाइट : एक आत्मकथा

(सच बोलने की सज़ा में आज तक सलीब पर टंगा है वो)

दुष्यंत कुमार की ग़ज़ल के शेर हैं-

“ कैसे आकाश में सूराख हो नहीं सकता

एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो

लोग कहते थे कि ये बात नहीं कहने की

तुमने कह दी है तो कहने की सज़ा लो यारो ”

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मैंने जब से आत्मकथा लिखनी शुरू की है और उसका प्रकाशन अपने ब्लॉग एवं फेसबुक पर शुरू किया है, तब से मेरे कई अपने पराये हो गए हैं, उन्हें लगता है कि कई कडियां उनको ही टार्गेट बना कर लिखी गई है, ऐसा उनके बदले हुए व्यवहार ने मुझे समझा दिया है, हालांकि आत्मकथा मेरी है और हां, जो किरदार समय – समय पर मुझसे जिस रूप में जुडे हैं, उनका जिक्र उसी रूप में होना तो स्वाभाविक ही है, मैं उससे कैसे बच सकता हूं या उन्हें कैसे बचा सकता हूं  ? और इसके अलावा सच्चाई यह भी है कि उन्होंने जब कोई बात मुझे बताई और वे यह समझते थे कि उसे गोपनीय रखी जानी चाहिए थी तो उसके लिए मुझसे कोई वादा भी तो नहीं लिया था उन्होंने; और सबसे बडी बात यह कि मैं अपने साथ काम करने वालों या बात करने वालों को यह स्पष्ट भी करता रहता हूं कि मुझे किसी के बारे में कोई ऐसी बात न बताएं जिसे वे उस संबंधित व्यक्ति या किसी और के सामने कह नहीं सकते। अब तक 30 से अधिक कडियां मेरे ब्लॉग पर प्रकाशित हो चुकी हैं और दो दर्जन से अधिक देशों के हजारों प्रवासी हिंदीभाषी उसे पढ चुके हैं और बडी संख्या में विदेशी पाठक मेरे ब्लॉग के सब्सक्राईबर बन चुके हैं। मैं समझता हूं कि यह एपीसोड भी मुझसे मेरे कई अपनों को दूर कर देगा, फिर भी, मैं क्या कर सकता हूं? अपनी लेखकीय ईमानदारी की सजा तो भुगतनी ही पडेगी

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    डायनैमिक और डाइनामाइट : एक आत्मकथा

(आपका यह आदेश अवैध है और अवैध आदेश मानने को मैं वाध्य नहीं हूं)

इंदिरापुरम, 10 जनवरी 2016

“ तुम्हारे  पांव के   नीचे  कोई ज़मीन नहीं

कमाल ये है कि फिर भी तुम्हें यकीन नहीं

तुझे क़सम है खुदी को बहुत हलाक़ न कर

तू इस मशीन का  पुर्जा है, तू मशीन नहीं ”

कुछ कारिंदे ऐसे होते हैं जो खुद को कारोबार समझ लेते हैं, कुछ मुसाफिर ऐसे होते हैं जो खुद को मुल्क समझ लेते हैं, कुछ ऐसे सेवक होते हैं जो खुद को सरकार समझ लेते हैं तो कुछ खादिम ऐसे होते हैं जो खुद को खुदा समझ लेते हैं और कुछ ऐसे गुलाम होते हैं जो खुद को बादशाह समझ लेते हैं; वैसे लोग कोई समस्या पैदा नहीं करते, खुद एक समस्या होते हैं, मैं ऐसे लोगों से दो – चार होता रहा हूं , तो आईए, देखते हैं कि पिंजडे की किस्में कौन – कौन – सी हैं और तोते के डीएनए में क्या – क्या है ?

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        डायनैमिक और डाइनामाइट

 

 

सरफरोशान–ए–वतन, रूह–ए–वतन , ज़ान –ए– वतन

तुझे  हम  फूल  चढाते  हैं   शहीदान -ए– वतन

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पठानकोट आतंकवादी घटना में शहीद जवानों को बार – बार सलाम, हज़ार बार सलाम !

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मैंने शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए टिप्पणी की थी – “यह शोक मनाने का नहीं, रगों में दौडते हुए

लहू में उबाल लाने का वक्त है”।

एक ज़नाब ने कमेंट किया –“ क्या कर लोगे उबाल लाकर ? .. गोली चलाने के लिए वर्दी धारण करनी होगी श्रीमान! .. ग्रुप में उबाल लाने से कुछ नहीं होगा ”।

एक मोहतरमा ने कमेंट किया –  “मेरे मन में सवाल है, बम निरोधक पथ (शायद उनका आशय ‘दस्ता’ से रहा होगा) का व्यक्ति बम फटने से शहीद होता है। इसमें कहीं व्यवस्था में कमी तो नहीं ? … सभी नौकरी करते हैं केवल पैसे के लिए ” ।

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डायनैमिक और डाइनामाइट : एक आत्मकथा       (पिंजडे की किस्म और तोते का डीएनए-3)

तो, पंजाब नैशनल बैंक के प्रधान कार्यालय राजभाषा विभाग नई दिल्ली में ज्वाईन करते ही मेरे सामने अनगिनत चुनौतियों के द्वार खुल गए थे। ज्वाईन करने के दिन शाम को 4 बजे स्टाफ मीटिंग के दौरान  मैंने कोहली जी से पूछा कि ‘उपस्थिति रजिस्टर के अनुसार एक अफसर लम्बी छुट्टी पर थे ’ ? उन्होंने बताया कि टीएन शर्मा स्केल वन के अधिकारी थे और चूंकि उनकी पीएल यानी विशेषाधिकार छुट्टियां लैप्स हो रही थीं, इसीलिए वे छुट्टी अवेल कर रहे थे । विदित है कि उन दिनों बैंक में मुख्य रूप से तीन प्रकार की छुट्टियां मिलती थीं – सीएल (कैजुअल लिव) यानी आकस्मिक अवकाश साल में 12 दिन मिलते थे और वह एक साथ 4 दिन से अधिक नहीं लिया जा सकता था; सिक लिव यानी बीमारी की छुट्टियां, आधे वेतन पर साल में 30 दिन या पूरे वेतन के साथ 15 दिन की छुट्टियां मिलती थीं जो नौकरी शुरू होने से 18 साल तक लगातार मिलती थीं और 6 साल का गैप दे कर फिर 3 साल तक मिलती थीं अर्थात वे छुट्टियां पूरे सेवाकाल में आधे वेतन के साथ 21 महीने या पूरे वेतन के साथ 10 माह 15 दिन ली जा सकती थीं; पीएल (विशेषाधिकार अवकाश) जिसे सरकारी कार्यालयों में ईएल यानी अर्जित अवकाश भी कहते थे, प्रति ग्यारह दिनों (साप्ताहिक, सार्वजनिक तथा आकस्मिक अवकाश सहित) की उपस्थिति पर एक दिन की छुट्टी की दर से साल में अधिकतम 33 दिनों की छुट्टियां मिलती थीं जिनमें पूरे सेवाकाल में एक साथ अधिक से अधिक 240 दिन तक ही जमा हो सकते थे यानी यदि किसी के खाते में 240 दिनों से अधिक की पीएल जमा होने वाली हो तो वह लैप्स यानी समाप्त हो जाती थी, इसीलिए जिसके खाते में ऐसा होना होता था , वह अनावश्यक रूप से छुट्टी ले लेता था ताकि जमा छुट्टियों की संख्या 240 के अन्दर ही रहे और वह सुविधा केवल उसी को स्वीकृत होती थी जिस पर बॉस मेहरबान होता था।

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  डायनैमिक और डाइनामाइट (आत्मकथा की अगली कडी 3 जनवरी 2016 को)

नववर्ष – 2016 के लिए :

शुभकामनाएं

नववर्ष

आपके लिए

आपके परिवार के लिए

समाज और  राष्ट्र के लिए

विश्व के लिए

मानव जाति और प्राणिमात्र के लिए

सकल चराचर के लिए

मंगलमय हो ……

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