डायनैमिक और डाइनामाइट : एक आत्मकथा

कुछ यादगार लम्हें

इंदिरापुरम,  27 मार्च 2016

मेरी नज़र में खुशहाल ज़िन्दगी से बडा और खुशनुमा कोई दूसरा जश्न व जुलुस नहीं होता, अब यह हमारे ऊपर है कि हम खुशहाल ज़िन्दगी की परिभाषा क्या गढते हैं।

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डायनैमिक और डाइनामाइट : एक आत्मकथ

(वैष्णव जन तेणे ते कहिए, जे पीर पराई जाणे रे )

इंदिरापुरम, 17 मार्च 2016

महात्मा गांधी की प्रार्थना सभाओं में गाई जाने वाली प्रार्थनाओं में सबसे अहम प्रार्थना थी –

“वैष्णव जन तेणे ते कहिए, जे पीर पराई जाणे रे ” , यह प्रार्थना उनके जीवन, व्यक्तित्व और नैतिक चरित्र का हिस्सा थी। यह प्रार्थना उनके वचनों में ही नहीं, उनके नित्य के कर्मों में भी समाहित थी। गांधी जी मेरे स्वाभाविक आदर्श हैं ।  मैं उनकी इस प्रार्थना को ही अपनी भी प्रार्थना के रूप में अपनाते हुए सोचता हूं कि यदि उसका शतांश भी स्वयं में उतार पाया तो मैं अपनेआप को सफल व सौभाग्यशाली मनुष्य समझूंगा। इस विषय को आगे बढाने के पहले मैं मेरे ब्लॉग के सुधी पाठकों की कुछ चर्चा करना और उनके प्रति आभार प्रकट करना आवश्यक समझता हूं।

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डायनैमिक और डाइनामाइट : एक आत्मकथा

(कुछ ऐसे वैसे तो कुछ जैसे तैसे और न जाने कैसे कैसे)

इंदिरापुरम, 12 मार्च 2016

कुछ ऐसे वैसे देशभक्त हैं तो कुछ जैसे तैसे ईमानदार हैं और न जाने कैसे – कैसे लाचार हैं? हैरान और परेशान हो जाता हूं मैं उन सब को देख – सुन कर और उनकी सोच के बारे में सोच – सोच कर सोच में पड जाता हूं कि यदि टेलीविजन चैनल न होते तो इन वयानवीरों के बरताव से अनजान ही रह जाते और सोशल मीडिया न होता तो उन करतबबाजों की कारगुजारियों  का लुत्फ उठाने के सौभाग्य से वंचित ही रह जाते हम सब और उनकी उलजलुल हरकतों पर कहकहे लगाने वालों के हाथों से कई हसीन मौके फिसल जाते। तुर्रा यह भी है कि यह सब कुछ देशभक्ति और ईमानदारी तथा ‘क्या करें ऊपर का दबाव था’ जैसी रीढविहीन सोच के नाम पर हो रहा है।

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डायनैमिक और डाइनामाइट : एक आत्मकथा

(आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष)

इंदिरापुरम, 08 मार्च 2016

महज संयोग ही है यह कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस से ठीक दो दिन पहले यानी 06 मार्च को मेरी शादी की 37वीं वर्षगांठ थी। मैंने अपनी शादी की रात में  भावी पत्नी की सहेलियों के मनुहार पर उन्हीं दिनों लिखी अपनी एक कविता सुनाई थी, वस्तुत: मैंने वह कविता मेरी भावी पत्नी और विश्व की सभी महिलाओं के सम्मान में उन्हीं दिनों लिखी थी। वह कविता और पत्नी के साथ एक ताज़ा ली गई तस्बीर मैंने 06 मार्च को अपने फेसबुक shreelal prasad और फेसबुक कम्युनिटी पेज shreelal Prasad aman तथा ब्लॉग shreelal.in पर पोस्ट की थी। कुल मिला कर 936 से भी अधिक शुभचिंतकों ने उसे पसन्द किया और शुभकामनाएं देते हुए अपने उद्गार व्यक्त किए, मैं और मेरी पत्नी पुष्पा प्रसाद उन सबके प्रति आभार प्रकट करते हैं ।

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डायनैमिक और डाइनामाइट : एक आत्मकथा

सत्यं शिवं सुन्दरं 

इंदिरापुरम, 06 मार्च 2016

कल ही की बात लगती है यह, हालांकि 37 वर्ष हो गए, 06 मार्च 1979 को सनातनी हिन्दु रीतिरिवाज से मैं और पुष्पा शादी के पवित्र बंधन में बंधे , तमन्ना है कि कम से कम आगे और 37 से एक वर्ष अधिक हम ऐसे ही साथ जीएं, तब हम मेरी उम्र की शतवार्षीकि और अपनी शादी की 75वीं वर्षगांठ मना रहे होंगे।

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डायनैमिक और डाइनामाइट : एक आत्मकथा

जो लोग यह सवाल उठाते हैं कि आज़ादी के सात दशक के बाद सरकारी कार्यालयों में हिंदी कहां पहुंची है, 

उन्हें खुद इस सवाल का जवाब भी देना होगा कि आखिर वह चली कहां से थी ?

इंदिरापुरम , 04 मार्च 2016

भारत सरकार गृह मंत्रालय राजभाषा विभाग केन्द्रीय अनुवाद ब्युरो द्वारा आयोजित पुनश्चर्या पाठ्यक्रम का आज समापन दिवस था, सीजीओ कम्पलेक्स के पर्यावरण भवन स्थित अनुवाद ब्युरो के सभाकक्ष में राजभाषा प्रबंधन विषय पर व्याख्यान देने के लिए ब्युरो ने मुझे मुख्य वक्ता के रूप में आमंत्रित किया था, उसके लिए मैं निदेशक डॉ. एस एन सिंह का विशेष रूप से आभारी हूं, साथ ही, ब्युरो के संयुक्त निदेशक श्री संदलेश और प्रशिक्षक श्री सत्येन्द्र कुमार सिंह को भी धन्यवाद देना चाहूंगा।

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