डायनैमिक और डाइनामाइट : एक आत्मकथा

.. और चुनौतियों का सिलसिला जारी रहा ..

मैं नहीं चाहता था कि चारों तरफ से चुनौतियां एक साथ ही आ खडी हो जाएं और

मैं चुनौतियों के चक्रव्युह में अभिमन्यु की तरह घिर जाऊं। मैं अर्जुन की तरह

चुनौतियों का सामना करना चाहता था, सामने कृपाचार्य या द्रोणाचार्य अथवा भीष्म ही क्यों न हों।

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डायनैमिक और डाइनामाइट : एक आत्मकथा

जब सत्ता के सलाहकार चाटुकार होने लगेंं और प्रवक्ता प्रवचन करने लगेंं तो समझ लीजिए कि 

दिन अच्छे या बुरे आने वाले नहीं, बल्कि पूरे होने वाले हैं, क्योंकि देश में अब तक किसी भी
केन्द्रीय सत्ता की उतनी फज़ीहत नहीं हुई जितनी उत्तराखण्ड प्रकरण में वर्तमान केन्द्र सरकार
की हुई है।

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डायनैमिक और डाइनामाइट : एक आत्मकथा

नेताजी सुभाषचन्द्र बोस की विरासत और  गुमनामी बाबा का सच

बनाम

पश्चिम बंगाल का विधान सभा चुनाव

इंदिरापुरम, 05 मई 2016

क्या किसी महान व्यक्ति की विरासत का मतलब केवल उसके वंशज होते हैं ? क्या उस विरासत की रक्षा करना, उसे आगे बढाना , उसके सपनों को पूरा करना केवल उसके वंशजों की ही जिम्मेदारी होती है ? क्या उसके वंशजों की शरण में गए वगैर उस महान व्यक्ति का नामोनिशान नहीं बच पाएगा ? क्या ईसा मसीह, महावीर, बुद्ध, महात्मा गांधी के वंशजों ने ही उनके विचारों को सारी दुनिया में फैलाया ? इसका उत्तर यदि ‘हां’ है तो बतलाया जाए कि किस महान व्यक्ति के किस वंशज ने क्या किया और यदि उत्तर ‘नहीं’ है तो फिर नेताजी सुभाषचन्द्र बोस के वंशज को मोहरा क्यों बनाया गया ?

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