डायनैमिक और डाइनामाइट : एक आत्मकथा

4IMG                                                                  कृष्ण जन्माष्टमी पर विशेष

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नटनागर  कृष्ण                          अदभुत कृष्ण
मेरा नाती ( कुमार श्रेष्ठ)         अपूर्व अमन ( मेरा पोता)  

इंदिरापुरम, 25 अगस्त 2016

कृष्ण पुराण- पुरूष हैं या इतिहास – पुरूष, योगेश्वर हैं या परमेश्वर, मनमोहन हैं या निर्मोही , नीति – अनीति का विचार किए वगैर व्याहता राधा और असंख्य गोप – कन्याओं के संग रास रचाने वाले कृष्ण लीलापुरूषोत्तम हैं या ब्रह्माण्ड वैभव निमिष मात्र में न्योछावर कर देने वाले रागद्वेष से परे ब्रह्म, शरीर सुख के भोगी हैं या आत्मज्ञान के योगी, मथुरा से भाग कर समुद्र में द्वारिका नगरी बसाने वाले कृष्ण रणछोड हैं या कुरूक्षेत्र के महा रणनीतिकार, कपोलकल्पित पात्र हैं या वास्तविक चरित्र; ये सारे प्रश्न मानव मन को निरंतर उद्वेलित करते रहे हैं , इन प्रश्नों का न कोई उत्तर है और न ही इनका कोई अंत है; इसीलिए इस बहस में मुझे नहीं उलझना है।

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डायनैमिक और डाइनामाइट : एक आत्मकथा

                                                                                    भारत के स्वाधीनता – दिवस – 15 अगस्त पर विशेष

इंदिरापुरम, 15 अगस्त 2016

भारत की आज़ादी के 69 वर्ष पूरे हो गए, आज 70वां स्वतंत्रता – दिवस है। देश – विदेश में रह रहे सभी भारतवासियों, भारतवंशियों और संसार के समस्त स्वतंत्रता – प्रेमियों को स्वाधीनता – दिवस की हार्दिक बधाइयां व शुभकामनाएं।

देश की आज़ादी की 69वीं वर्षगांठ पर सोसल मीडिया सहित अन्य मंचों पर भी बहुत कुछ बहुत तरह से देखने- पढने – सुनने को मिल रहा है; कुछ लोग आज़ादी को बेमानी बता रहे हैं, कुछ लोग आज़ादी को अंधी गली बता रहे हैं तो कुछ लोग कुछ खास लोगों के लिए ही स्वतंत्रता की सार्थकता बता रहे हैं। कहीं संविधान, राष्ट्रगान और राष्ट्रीय झंडे का अनादर करने तथा देश के विरुद्ध नारे लगाने के खेल चल रहे हैं, कहीं जाति और धर्म के नाम पर, पार्टी और समुदाय के नाम पर , परम्परा और गाय की रक्षा के नाम पर आतंक का पर्याय बन कर खुद को अति प्रगतिशील या अति धार्मिक अथवा अति राष्ट्रवादी साबित करने पर तुले हुए हैं लोग, तो कहीं कुछ लोगों की नज़र में 70 सालों की आज़ादी में देश में केवल लूटमार ही हुई, देश ने कोई प्रगति नहीं की, यदि उन्हें मौका मिला होता तो उन्होंने भारत को स्वर्ग बना दिया होता। और तो और , कुछ लोग इतने हताश– निराश लगते हैं कि इस आज़ादी से बेहतर ग़ुलामी के दिनों को ही बताने लगे हैं।
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डायनैमिक और डाइनामाइट ; एक आत्मकथा

{ “तथाकथित गोरक्षक गोसेवा के नाम पर गोरखधंधा कर रहे हैं –

मारना ही है तो मुझे गोली मार दीजिए,

                मेरे दलित भाइयों को मत मारिए”
      प्रधानमंत्री जी के इन सख्त बयानों के निहितार्थ }
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इंदिरापुरम, 08 अगस्त 2016
गोरक्षा के नाम पर साम्प्रदायिक सद्भाव को बिगाडने वाली गतिविधियों के विरुद्ध भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र भाई मोदी ने 6 और 7 अगस्त को बडा बयान दिया है। उन्होंने 6 अगस्त को दिल्ली में “माई गव” की दूसरी वर्षगांठ पर आयोजित एक कार्यक्रम में पहला सख्त बयान दिया और उससे भी अधिक तल्ख तेवर के साथ और भावुकता का भी पुट देते हुए 7 अगस्त को तेलंगाना की एक जनसभा में दूसरा बयान दिया। प्रधानमंत्री जी ने 6 अगस्त को कहा था कि गोरक्षा के नाम पर दुकानें बंद हों क्योंकि तथाकथित गोरक्षकों में 80% से अधिक लोग असामाजिक तत्व होते हैं और गोसेवा के नाम पर गोरखधंधा करते हैं। 7 अगस्त को उन्होंने कहा कि दलितों पर हिंसा करने वाले चाहें तो खुद उन्हें गोली मार दें किंतु दलित भाइयों पर वार न करें तथा जाति , धर्म और हैसियत के आधार पर समाज को न बांटें।

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