नोटबंदी : संभावित मुसीबतों से बचाव के उपाय

25 नवम्बर, 2016

नोटबंदी की घोषणा के विविधआयामी परिणाम हम देख – सुन रहे हैं, ताजा खबरों के अनुसार साधारण जनता को एक नई मुसीबत की आहट सुनाई पड रही है। यदि वह मुसीबत एक बार आ गई तो मालिक और नौकर के बीच संदेह बढ जाएगा, नियोक्ता और कर्मचारियों के बीच आपसी विश्वास की कमी आ जाएगी, कभी मददगार रहे पडोसी भी संदेह के दायरे में आ जाएंगे , भाई से भाई का भरोसा भी उठ सकता है , क्योंकि एक छोटी – सी जानकारी हाथ लग जाने पर चालाक लोग सीधे – सादे आदमी को उसकी जानकारी के वगैर मुसीबत में डाल देंगे और वह सीधा – सादा आदमी जिन्दगी भर सफाई देता फिरेगा, मुकदमा लडता रहेगा। वैसी मुसीबत यदि आ गई तो उसे दूर करना बहुत ही मुश्किल हो जाएगा, इसलिए उसे दूर रखना ही बेहतर है और उसे दूर रखने का काम केवल सिस्टम ही कर सकता है , सिस्टम में शासन, प्रशासन , भारतीय रिज़र्व बैंक और बैंकिंग प्रणाली आदि शामिल हैं। वह नई मुसीबत क्या, कैसी और कौन – सी है, उसकी चर्चा हम करेंगे, लेकिन पहले नोटबंदी की घोषणा के बाद के परिदृश्य की चर्चा कर ली जाए ।

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न्याय होना जरूरी है , न्याय होता दिखना भी जरूरी है  

 

चूंकि यह न तो सरहद का युद्ध था, न आतंकवादियों का हमला, न दंगा – फसाद, न हादसा और न ही अकाल; न सूखा,  न बाढ, न सूनामी , न भूकम्प,

 तो फिर, जो जानें गईं , उनका जिम्मेवार कौन ? 

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नेक नीयत व नीति को लागू करने में त्राहिमाम क्यों?

                        अच्छे निर्णय के पीछे अच्छे तर्क नहीं हैं, क्यों?

                  पूरी तैयारी पहले से न कर पाने के पीछे लचर तर्क क्यों?

                              सलाहकारों का इतना और ऐसा टोटा क्यों?

संवेदनशील जनमानस का भावनात्मक दोहन क्यों?

 आर्थिक आपात्काल जैसे हालात क्यों?

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प्रभावकारी और प्रशंसनीय पहल

संदर्भ : 500 और 1000 रूपये मूल्य के नोटों का प्रचलन बन्द करना

भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र भाई मोदी ने 08 नवम्बर 2016 की रात 8 बजे राष्ट्र के नाम संबोधन में घोषणा की कि रात 12 बजे के बाद यानी कुछ ही घंटों बाद से 500 एवं 1000 रूपये मूल्य के नोट कानूनी करेंसी नहीं रह जाएंगे और उनके बदले 10 नवम्बर से 500 तथा 2000 के नये नोट जारी कर दिए जाएंगे । उसके बाद भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल,  डेपुटी गवर्नर श्री गांधी तथा भारत के वित्त सचिव शशिकांत दास का संयुक्त प्रेस कॉंफ्रेंस भी हुआ जिसमें सरकार के उक्त निर्णयों की बारीकियों और परिचालन की विधियों की विस्तार से जानकारी दी गई। बताया गया कि 09 नवम्वबर को देश के सभी बैंक बन्द रहेंगे एवं एटीएम से नकद लेनदेन नहीं होगा तथा 10 नवम्बर को भी कुछ क्षेत्रों में एटीएम से नकद लेनदेन नहीं हो सकेंगे। इसका उद्देश्य एटीएम में रखे 500 और 1000 के पुराने नोटों को हटाने तथा बैंक स्तर पर अन्य आंतरिक तैयारियां करना बताया गया।

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महान लोगों से भूलें भी महान ही होतीं हैं ?


                                                               विशेष उल्लेख : बाबा साहब भीमराव अम्बेदकर,

                                           विश्वप्रसिद्ध भाषा वैज्ञानिक डॉ. सुनीति कुमार चट्टर्जी और प्रख्यात पत्रकार कुलदीप नैयर

( यह आलेख धैर्यपूर्वक अध्ययन की मांग करताहै)

कौन कहता है कि महान लोगों से भूलें नहीं होतीं ? सच तो यह है कि महान लोगों से भूलें भी महान ही होतीं हैं। यह अलग बात है कि महान लोगों से लिखने में हुई भूलों को ‘स्लिप ऑफ पेन’ तथा बोलने में हुई भूलों को ‘स्लिप ऑफ टन्ग’ कह कर नज़रअन्दाज़ कर दिया जाता है । हालांकि महान विभूतियों की छोटी – सी भूल इतिहास को भयंकर मोड दे देती है तथा आने वाली पीढियों के लिए भ्रांतिपूर्ण तथ्यों का भयावह विवाद छोड जाती है। पौराणिक गाथाओं से ले कर ऐतिहासिक आख्यानों तक में ऐसे अनेक उदाहरण भरे पडे हैं , लेकिन यहां ताज़ा संदर्भ है प्रसिद्ध पत्रकार कुलदीप नैयर की 2006 में अंगरेजी में प्रकाशित पुस्तक ‘SCOOP’  के आधार पर ‘नई दुनिया’ अखबार द्वारा छापी गई एक रपट और गोविन्द पंडित स्वप्नदर्शी द्वारा उसे अपने फेसबुक वाल पर शेयर किया जाना।

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जहां ग़लत साबित हो जाता है विश्वप्रसिद्ध मुहावरा

 बिहारियों की आस्था का महापर्व : छठ

संभव है कि आप , वे या हम छठ की महिमा और उसके प्रभाव की प्रामाणिकता पर आस्था न रखते हों, फिर भी, यह तो जानना ही चाहेंगे कि वह कौन – सा विश्वप्रसिद्ध मुहावरा है जो छठ पर्व से ग़लत साबित हो जाता है और क्यों व कैसे ?

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