वर्चस्व का महासमर – बदलता इतिहास

वर्चस्व का महासमर – बदलता इतिहास      

डायनैमिक और डाइनामाइट (अकथ कथा : आत्मकथा)

 इंदिरापुरम , 27 दिसम्बर 2016

धर्म-युद्ध का गीता – ज्ञान तो कृष्ण ने अर्जुन को दिया किंतु युद्ध-धर्म का क्या हुआ ? कृष्ण ने दुर्योधन के उस अंग पर भी प्रहार कराया जो निषिद्ध था। तभी तो गांधारी ने कृष्ण को शाप दिया। इस मायने में, तमाम मानवीय कमजोरियों के बावजूद, महात्मा गांधी कृष्ण से इतर दिखते हैं, गांधी ने साध्य के साथ – साथ साधन की शुद्धता पर भी बल दिया। इसलिए मैं शापित कृष्ण तथा शहीद गांधी को पसन्द करता हूं और कृष्ण की भूमिका एवं गांधी को याद रखता हूं।

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वर्चस्व का महासमर 1: रिज़र्व बैंक बनाम वित्त मंत्रालय एवं गृहमंत्रालय

  वर्चस्व का महासमर 1: रिज़र्व बैंक बनाम वित्त मंत्रालय एवं गृहमंत्रालय

 डायनैमिक और डाइनामाइट (अकथ कथा : आत्मकथा)

अहमदाबाद , 22 दिसम्बर 2016

गीता का ज्ञान देना आसान है किंतु मोह – पाश से मुक्त हो कर अपनों से युद्ध करना मुश्किल, इसलिए कृष्ण बनने से कठिन कार्य अर्जुन बनना है; तभी तो मैं कृष्ण की तरह वर्षों से अर्जुन की तलाश करता रहा।

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वैसे ही, चाणक्य बनने से अधिक दुष्कर कार्य चन्द्रगुप्त बनना है; तभी तो मैं चाणक्य की तरह दशकों तक चन्द्रगुप्त को ढूंढता रहा। हम इस तलाश से

रू-ब-रू होंगे, अगली तीन कडियों में । प्रस्तुत है पहली कडी।

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डिजिटल इंडिया का अग्रदूत – अपूर्व अमन : जीवेत शरदं शतं

डिजिटल इंडिया का अग्रदूत – अपूर्व अमन : जीवेत शरदं शतं

 

अहमदाबाद , 16 दिसम्बर 2016

 

मेरा पोता अपूर्व अमन आज दो वर्ष का हो गया। उसे जन्मदिन की हार्दिक बधाइयां , शुभकामनाएं व अशेष शुभाशीर्वाद।

अपूर्व अच्छाइयों और मानवीय सद्गुणों में सही मायने में अपूर्व हो, अद्भुत हो, अद्वितीय हो, उसका व्यक्तित्व एवं कृतित्व अवर्णनीय अकथनीय आदरणीय व अभिनन्दनीय हो, वह स्नेह, सद्भावना व मानवीय संवेदना से परिपूर्ण हो, अहिंसा व अमन का फरिश्ता हो, स्वाभिमान व राष्ट्राभिमान का प्रमाण हो, यश व ऐश्वर्य का ध्वजवाहक हो, बुद्धि विवेक व संयम का नायक हो और सुखी सम्पन्न व स्वस्थ – प्रसन्न आयुष्मान हो; ये सब उसके स्वाभाविक सद्गुण होंगे, यदि वह वही बने जो वह बनना चाहे व बनने की काबिलियत स्वयं में पैदा कर सद्पुरूष बने।

अपूर्व अमन का जन्म 16 दिसम्बर 2014 को दिल्ली में हुआ था। मेरे एकमात्र पुत्र कुमार पुष्पक और बहू आरती पुष्पक का प्रथम पुत्र अपूर्व शुरू से ही अपनी रहस्यमयी मुस्कराहटों और मनमोहक अठखेलियों से सबके आकर्षण का केन्द्र बन गया है। उसे मेरा ही नाम, ’अमन’ , जिस नाम से मैं साहित्य सृजन के क्षेत्र में जाना जाता हूं, मेरे पुत्र ने दिया।

ईश्वर है या नहीं, इस विषय पर ज्ञानी – ध्यानी – विज्ञानी महात्मा लोग मीमांसा करें, मैं तो इतना ही कहना चाहता हूं कि यदि ईश्वर है और वही मनुष्य का भाग्य – विधाता है तथा सब कुछ वही देता है तो , भले ही मेरे पोते को मेरा नाम मिल गया है, ईश्वर उसे उसके दादा में कोई अच्छाइयां हों तो वही दें, दादा में जो बुराइयां हों, उनसे उसे दूर रखें और जो कुछ भी वह बनना चाहता है, वह बनने के लिए उसे आवश्यक इच्छा, ज्ञान व कर्म दें तथा उसे यह आशीर्वाद दें कि उसका कर्म – धर्म – मर्म सब कुछ मानव कल्याण के लिए हो।   इसके लिए मैं उस ईश्वर से प्रार्थना करता हूं जिसके होने या न होने के बारे में यकीनी तौर पर मुझे खुद ही कुछ पता नहीं।

उन सब के बावजूद, मैं उसी ईश्वर से प्रार्थना करता हूं क्योंकि जब तक मेरे बच्चे इस दुनिया में नहीं आये थे, तो अपने माता – पिता और पूर्वजों में उस ईश्वर को महसूस करता था और आज जब ये मेरे सामने हैं तो अब इन में ही मूर्त – अमूर्त , सभी देवी – देवताओं के दर्शन करता हूं, इनके प्रति स्नेह, ममत्व, मोह या हर्ष व अमर्ष वैसे ही हैं, जैसे मेरे पूर्वजों के प्रति मेरे मन में थे और हैं तथा ईश्वर व देवी – देवताओं के प्रति हैं। मेरी नीयत व नीति साफ है, मेरे लिए मेरे पूर्वज और मेरे आत्मज ही देवी – देवता हैं तथा उनके लिए मैं किसी भी देवी – देवता की आराधना कर सकता हूं।

जीवन संयोगों का संयुक्त स्वरूप है। यह संयोग ही है कि मेरे पोते अपूर्व अमन का आज जन्मदिन बंगलोर में मनाया जा रहा है, वहीं मेरे बेटे – बहू , छोटी बेटी शिप्रा व दामाद अभिषेक आर्यन तथा अन्य कई निकट के सगे – संबंधी व स्वजन – परिजन हैं, किंतु मैं पत्नी पुष्पा प्रसाद के साथ बडी बेटी शिल्पा श्री, दामाद सुमीत कुमार और नाती कुमार श्रेष्ठ के पास अहमदाबाद में हूं। यहां पहले नाती, फिर दामाद और फिरा बेटी बीमार हुई, उनकी देखरेख के लिए हम दिल्ली से अहमदाबाद आ गए थे। ठीक इसी प्रकार का संयोग उस वक्त भी बना जब मेरा नाती कुमार श्रेष्ठ पिछले 18 अक्टूबर 2016 को दो वर्ष का हुआ और उसका जन्मदिन यहां अहमदाबाद में मनाया जा रहा था , तब मैं पत्नी पुष्पा के साथ बेटा पुष्पक के पास बंगलोर में था क्योंकि मैं खुद टॉयफॉयड और चिकनगुनिया से पीडित था।

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इस प्रकार मेरे आवास – निवास का त्रिकोण – सा बन गया है , दिल्ली – बंगलोर और अहमदाबाद ; चौथा कोण गांव – घर चम्पारण , बिहार का है जो स्वत: समय – समय पर जुडता रहता है। ये चारों स्थान भारत के नक्शे में क्र्मश: उत्तर, दक्षिण , पश्चिम और पूरब में स्थित हैं, इस प्रकार यहां आ – जा कर मैं चारों धाम की यात्रा वैसे ही पूरी कर लेता हूं जैसे गणेश ने शिव – पार्वती की परिक्रमा कर अपना विश्व भ्रमण पूरा कर लिया था ।

मैं अपने समस्त स्वजनों – परिजनों और हित – मीत – शुभैषियों से आग्रह करता हूं कि मेरे पोता अपूर्व अमन और नाती कुमार श्रेष्ठ को स्वस्थ – प्रसन्न व दीर्घ जीवन के लिए अपना स्नेहिल आशीर्वाद व वरदान दें ।

बधाइयां शुभकामनाएं शुभाशीर्वाद !

“अमन” श्रीलाल प्रसाद

मो. 9310249821

ब्लॉग ; shreelal.in

पढिए और कुछ कहिए भी, लेकिन ….

                                                            पढिए और कुछ कहिए भी, लेकिन ….

 06 दिसम्बर 2016

मैं आभारी हूं अपने प्रबुद्ध पाठकों का जिन्होंने मेरे ब्लॉग shreelal.in को खास बना दिया है। कुछ ही महीनों में 16 लाख 40 हजार से अधिक की विजिट्स , और वह भी उत्तरी अमेरिका, दक्षिणी अमेरिका, यूरोप और एशिया महादेशों के 60 से अधिक देशों के लाखों पाठकों द्वारा , मेरे लिए बहुत ही उत्साह – वर्द्धक है। अफ्रीकी और अस्ट्रेलियाई देशों से अभी कम ही पाठक मेरे ब्लॉग से जुड पाए हैं। मेरी कोशिश होगी कि मैं कुछ उन विषयों पर भी लिखूं जिनसे दुनिया के हर देश में मेरा पाठकवर्ग हो सके। मैं अपने सुधी पाठकों को एक बार फिर हृदय से धन्यवाद देता हूं।

मैं ने देखा है कि कमेंट्स के रूप में कुछ देशी और विदेशी व्यक्तियों एवं कम्पनियों ने अपने उत्पादों (प्रोडक्ट्स) एवं व्यवसाय का प्रचार मेरे ब्लॉग के माध्यम से करना शुरू कर दिया है, मैं ने उस तरह की बातें / चीजें मेरे ब्लॉग पर पोस्ट करने की न तो अनुमति दी है और न ही मैं वैसी गतिविधियों का अनुमोदन करता हूं। मैं पूरी विनम्रता और दृढता के साथ अनुरोध करता हूं कि मेरे लेखन से संबंधित कमेंट्स ही मेरे ब्लॉग के कमेंट्स बॉक्स में पोस्ट की जाएं ताकि स्वस्थ संवाद होता रहे। आप मेरे आलेख पढिए और कुछ कहिए भी , लेकिन कृपया इतना ध्यान अवश्य रखिए कि वह ब्लॉग पर प्रकाशित आलेखों के संबंध में ही हों ।

मैं सोसल मीडिया के अपने किसी भी अकाउंट पर मानवता, राष्ट्रीय सम्मान, संविधान व कानून , सामजिक प्रतिष्ठा और शिष्टाचार के विरुद्ध किसी भी तरह की अनपेक्षित सामग्री को पोस्ट करने की अनुमति नहीं देता।

स्वतंत्र भारत के संविधान – शिल्पी और धर्मनिरपेक्षता के प्रबल समर्थक बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेदकर की आज 61वीं पुण्यतिथि है, साठ वर्षों पहले 06 दिसम्बर 1956 को बाबा साहब का दिल्ली में देहावसान हुआ था। यह संयोग है कि उसी साल 14 अक्टूबर 1956 को यानी अपनी मृत्यु से कुछ ही दिनों पहले उन्होंने हिन्दू धर्म को त्याग कर बौद्ध धर्म को अपनाया था। भारतीय समाज की सबसे बडी बुराइयों – जातिवाद एवं  छुआछूत की जड व्यवस्था पर प्रभावी प्रहार करने वाले प्रगतिशील सोच, उद्याम जिजीविषा व उत्कर्षशील मनीषा के प्रतीक बाबा साहब की पुण्य तिथि पर मैं उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।

तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे जयललिता का बीती रात देहावसान हो गया, आज उनका अंतिम संस्कार होगा। वे उच्च कोटि की अभिनेत्री और गरीबों , महिलाओं व अपने समर्थकों के बीच अम्मा के रूप में अत्यंत लोकप्रिय राजनीतिज्ञ रहीं। मैं दिवंगत आत्मा की चिर शांति के लिए प्रार्थना करता हूं।

“अमन” श्रीलाल प्रसाद

मो. 9310249821

इमेल – shreelal_prasad@rediffmaila.com

इतिहास रचने की कवायद का वायरल सच

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आदर्श

श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पं. दीनदयाल उपाध्याय या

सरदार वल्लभ भाई पटेल अथवा अटल बिहारी बाजपेयी न होकर

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल हैं ?

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क्योंकि मोदी जी की एक – एक पहल चौंकाने वाली, ललकारने वाली, हडकाने वाली, देशभक्ति की भावना भडकाने वाली और सीधीसादी जनता को राष्ट्रीयता के भावबोध में पूरे धैर्य के साथ लाइन लगाने वाली शैली में है जिसका पेटेण्ट इंदिरा जी और केजरीवाल जी के नाम है और हमारा आदर्श तो वही कहलाता है, जिसके रास्ते हम चलते हैं।
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