डायनैमिक और डाइनामाइट

डायनैमिक और डाइनामाइट

(आवाज़ दो)

बंगलोर, 15 अगस्त 2015

स्वतंत्रता दिवस पर देश – विदेश में  रहने वाले तमाम हिन्दुस्तानियों का क्रांतिकारी अभिनन्दन
व स्वतंत्र चेतना और मानवीय संवेदना का सम्मान करने वालों को नमन !

“ न इज़्ज़त दे, न अज़मत दे, न सूरत दे, न सीरत दे  ;
  वतन  के  वास्ते  या  रब, मुझे मरने की हिम्मत दे ”

नज़ीर बनारसी के इन अल्फाजों का एक – एक हर्फ जीने वाले जोशीले, जज़्बाती व जुनूनी इंक़लाबी वतनपरस्त हिंदुस्तानियों के दम पर आज़ाद हैं हम आज । सवाल उठता है कि उस आज़ादी को बरकरार रखने के लिए, उसे मजबूत बनाने के लिए, उसे देश के जन – जन  और कण – कण  तक पहुंचाने के लिए हम और आप क्या कर रहे हैं, अल्लमा इकबाल ने भी कभी कहा था –

“ पत्थर की मूरतों में समझा है तू खुदा है
   हमको तो  वतन का  हर  जर्रा  देवता है ” Read more

अतीत के झरोखे से भविष्य की झांकी

अतीत के झरोखे से भविष्य की झांकी

आज मेरा पौत्र यानी मेरा पोता “अपूर्व अमन” ; मेरे एकमात्र पुत्र कुमार पुष्पक (जो एक एमएनसी नाउस NOUS बंगलोर में मैनेजर है और जिसे मैं “बाबू” कहता हूं क्योंकि मैं अपने (स्वर्गीय)पिता जी को बाबू कहता था और मेरा पुत्र मेरी इच्छाओं , जरूरतों , अभिरुचि एवं मेरे स्वाभिमान आदि  का ध्यान उसी तरह रखता है जैसे मेरे पिता जी रखा करते थे तथा  अपने पिता जी को हमेशा अपने पास महसूसने का इससे बेहतर माध्यम मुझे दूसरा कुछ नहीं सूझा) एवं मेरी बहू आरती कुमारी (एक्स एचआर एग्जीक्युटिव,  हैवलेट पैकर्ड बंगलोर ) का पुत्र चार माह और 16 दिन का हो गया ।

अपूर्व अमन का जन्म 16दिसम्बर , 2014 को ज़ामिया हमदर्द मेडिकल कालेज एवं अस्पताल नई दिल्ली में हुआ । उन दिनों मैं 35 साक्षर अपार्टमेंट , पश्चिम विहार , नई दिल्ली में सपरिवार रहता था।वह आवास पंजाब नैशनल बैंक , प्रधान कार्यालय , राजभाषा विभाग के  प्रभारी मुख्य प्रबंधक के रूप में कार्यरत रहने के  दौरान मुझे बैंक लीज पर उपलब्ध कराया गया था और  31 अक्टूबर , 2014 को बैंक से सेवानिवृत्त होने के बाद भी 31 जनवरी , 2015 तक वहां  रहने की अनुमति प्रदान की गई थी । वहीं रहते हुए, उसी अस्पताल में मेरे दौहित्र यानी मेरे नाती ( मेरी पुत्री शिल्पाश्री एमए मास्कॉम गोल्ड मेडलिस्ट  एवं जमाई सुमित कुमार प्रबंधक, भारतीय स्टेट बैंक,  का पुत्र) कुमार श्रेष्ठ का जन्म 18 अक्टूबर , 2014 को हुआ था । Read more

शत-शत बधाइयां, कोटिश: आभार

शत-शत बधाइयां, कोटिश: आभार

शत-शत बधाइयां, कोटिश: आभार
भारत के राष्ट्रपति माननीय श्री प्रणब मुखर्जी के कर – कमलों से विज्ञान भवन में इंदिरा गांधी राजभाषा पुरस्कार प्राप्त कर मैं अभी-अभी घर लौटा हूं और आप से बातें कर रहा हूं।
पंजाब नैशनल बैंक को लगातार दूसरे वर्ष इंदिरा गांधी राजभाषा पुरस्कारों में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है, इसके लिए पीएनबी परिवार के सभी साथियों को हार्दिक बधाइयां।
भारत सरकार ,गृह मंत्रालय,राजभाषा विभाग द्वारा विज्ञान भवन ,नई दिल्ली में 15 नवम्बर,2014 को राजभाषा समारोह का आयोजन किया गया। समारोह के मुख्य अतिथि थे माननीय श्री प्रणब मुखर्जी, राष्ट्रपति, भारत । मंच पर गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह, गृह राज्यमंत्री श्री किरण रिजीजु, राजभाषा विभाग की सचिव सुश्री नीता चौधरी आईएएस , संयुक्त सचिव श्रीमती पूनम जुनेजा तथा सभागार में केन्द्र सरकार के कार्यालयों, उपक्रमों, बैंकों आदि के शीर्ष कार्यपालक एवं राजभाषा प्रभारी विशेष रूप से उपस्थित थे । समारोह में वर्ष 2013-14 के इंदिरा गांधी राजभाषा पुरस्कार प्रदान किए गए । Read more

शुक्रिया

शुक्रिया

शुक्रिया उन सबका , जिन्होंने देश और देशवासियों के सर्वांगीन विकास के लिए प्रतिबद्ध महान बैंकिंग संस्थाओं में अग्रणी पंजाब नैशनल बैंक में 35 वर्षों से अधिक की सम्मानजनक सेवा पूरी कर 31.10.2014 को पीएनबी परिवार ही नहीं, देश का वरिष्ठ नागरिक बनने पर मुझे बधाइयां देते हुए स्वस्थ-प्रसन्न और सक्रिय जीवन की शुभकामनाएं दी हैं । इस सेवाकाल में 08.10.1979 से 04.09.1993 तक न्यु बैंक ऑफ इंडिया, जो बैंकों के राष्ट्रीयकरण के दूसरे चरण में 15 अप्रैल 1980 को राष्ट्रीयकृत हुआ था और जिसका 04.09.1993 को पंजाब नैशनल बैंक में विलय हो गया ) का कार्यकाल भी शामिल है;परन्तु 21.03.1977 से 06.10.1979 तक देश के प्रथम क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक – चम्पारण क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक का सेवाकाल शामिल नहीं है। 19 दिसम्बर, 1973 से 24.06.1974 तक एक हाई स्कूल में हिंदी शिक्षक के रूप में, और उसके महीनों बाद बिहार सरकार में एक सप्ताह का कार्यकाल बिलकुल अलग विषय है । बिहार सरकार की नौकरी मैंने स्वेछा से छोडी थी और हाई स्कूल वाली नौकरी मैंने स्वेछा से छोडी थी या छोडने के लिए मुझे कहा गया था या मुझसे छुडा ली गई थी ( इस विषय पर फिर कभी विस्तार से बातचीत होगी ) , यह अलग मीमांसा का विषय है,परंतु दोनों के मूल में एक ही कारण था और वह था जेपी आन्दोलन से मेरा लगाव । Read more

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